कंपनी के तिमाही नतीजे: एक मिली-जुली तस्वीर
NMDC लिमिटेड के स्टैंडअलोन (Standalone) तिमाही नतीजों की बात करें तो कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 14.6% बढ़कर ₹7,485.55 करोड़ पर पहुंच गया। लेकिन, प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) 10.1% घटकर ₹2,365.90 करोड़ पर आ गया, और नेट प्रॉफिट (PAT) 10.6% गिरकर ₹1,738.07 करोड़ हो गया। ऐसे में, अर्निंग्स पर शेयर (EPS) भी ₹1.98 रहा, जो पिछले साल ₹2.21 था।
अगर कंसोलिडेटेड (समग्र) नतीजों पर नजर डालें तो रेवेन्यू 15.9% बढ़कर ₹7,610.79 करोड़ हुआ, जबकि कंसोलिडेटेड PAT में 6.7% की गिरावट आई और यह ₹1,756.59 करोड़ रहा। कंसोलिडेटेड EPS ₹2.00 पर रहा।
वहीं, 9 महीनों के दौरान स्टैंडअलोन रेवेन्यू में 21.9% की ग्रोथ दिखी और यह ₹20,380.56 करोड़ रहा। स्टैंडअलोन PAT 3.9% बढ़कर ₹5,401.11 करोड़ हुआ, जिससे EPS ₹6.14 रहा।
तिमाही में रेवेन्यू ग्रोथ के मुकाबले मुनाफे में आई गिरावट लागत बढ़ने या कीमतों में दबाव का संकेत देती है।
ऑडिट रिपोर्ट में बड़े खुलासे: टैक्स और ड्यूज की चिंता
कंपनी के स्टैट्यूटरी ऑडिटर (Statutory Auditors) की रिपोर्ट में कुछ गंभीर बातों पर ध्यान दिलाया गया है। सबसे बड़ी चिंता ₹15,165.06 करोड़ की कंटिंजेंट टैक्स लायबिलिटी (Contingent Tax Liability) है, जो कर्नाटक के नए 'मिनरल राइट्स एंड मिनरल बेरिंग लैंड टैक्स बिल, 2024' से जुड़ी है। मैनेजमेंट का कहना है कि अगर यह बिल कानून बनता है तो वे इस राशि को ग्राहकों से वसूल करेंगे।
इसके अलावा, कंपनी पर NMDC Steel Limited ( ₹1,901.39 करोड़ + ₹4,889.13 करोड़ ) और Rashtriya Ispat Nigam Limited ( ₹4,104.59 करोड़ ) का बड़ा बकाया (Outstanding Dues) है। मैनेजमेंट इन बकायों की रिकवरी को लेकर आश्वस्त है, लेकिन यह रकम काफी बड़ी है। कानूनी मामलों की बात करें तो ₹1,623.44 करोड़ की डिमांड और ₹1,620.50 करोड़ का पेनाल्टी भी शामिल है। इनमें से ₹600 करोड़ का भुगतान कंपनी ने विरोध के बावजूद कर दिया है।
डिविडेंड और भविष्य की योजना
इन नतीजों के बीच, कंपनी ने शेयरधारकों को ₹2.50 प्रति शेयर का अंतरिम डिविडेंड (Interim Dividend) देने का ऐलान किया है। साथ ही, क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals) के लिए एक व्होली-ओन्ड सब्सिडियरी (Wholly-Owned Subsidiary - WOS) बनाने को मंजूरी भी दी गई है।
जोखिम और आगे की राह
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा जोखिम ₹15,165 करोड़ की टैक्स लायबिलिटी और सब्सिडियरी कंपनियों से बकाये की रिकवरी में अनिश्चितता है। साथ ही, चल रहे कानूनी विवाद भी चिंता का विषय बने हुए हैं। क्रिटिकल मिनरल्स में विस्तार एक बड़ा रणनीतिक कदम है, लेकिन इसका तत्काल वित्तीय असर सीमित रहेगा। आने वाली तिमाहियों में टैक्स बिल की स्थिति, बकाये की रिकवरी और कानूनी मामलों के समाधान पर निवेशकों की नजर रहेगी।