NMDC ने जून तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट 2% बढ़कर ₹2,005.71 करोड़ हो गया है। वहीं, कंपनी के आयरन ओर प्रोडक्शन में 26% की जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है।
मुनाफे में मामूली उछाल, प्रोडक्शन में बड़ी छलांग
नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NMDC) ने 30 जून, 2026 को समाप्त तिमाही के लिए अपने वित्तीय नतीजे पेश किए हैं। पिछले साल इसी अवधि में ₹1,967.46 करोड़ के मुकाबले कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 2% बढ़कर ₹2,005.71 करोड़ हो गया। इस दौरान कंपनी की कुल आय 1.5% बढ़कर ₹7,142.54 करोड़ दर्ज की गई।
ऑपरेशनल मोर्चे पर NMDC ने शानदार प्रदर्शन किया है। आयरन ओर प्रोडक्शन 26% बढ़कर 15.12 मिलियन टन हो गया। हालांकि, प्रॉफिट ग्रोथ प्रोडक्शन की रफ्तार से मेल नहीं खा पाई। ऐसा अक्सर आयरन ओर की कीमतों में उतार-चढ़ाव या ऑपरेटिंग लागत बढ़ने के कारण होता है, जो प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाल सकता है। कंपनी का EBITDA मार्जिन 36.3% रहा, जो पिछले साल के 36.8% से थोड़ा कम है।
आगे का लक्ष्य और प्रोजेक्ट्स
NMDC अपने प्रोडक्शन को बढ़ाने पर लगातार काम कर रही है। कंपनी का लक्ष्य चालू फाइनेंशियल ईयर में 60 मिलियन टन आयरन ओर प्रोडक्शन का है, और 2030 तक इसे 100 मिलियन टन तक ले जाने की योजना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स में निवेश कर रही है।
इसके साथ ही, NMDC अपनी सहायक कंपनी कर्नाटक विजयनगर स्टील लिमिटेड (KVSL) के माध्यम से कर्नाटक में 3 मिलियन टन प्रति वर्ष का स्टील प्लांट प्रोजेक्ट भी आगे बढ़ा रही है। इस प्रोजेक्ट के तहत, कंपनी ने जमीन के आवंटन के लिए कर्नाटक इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट बोर्ड को ₹639.61 करोड़ का एडवांस भुगतान किया है। हालांकि, अभी लीज एग्रीमेंट फाइनल होना बाकी है।
निवेशकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें
निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण बात राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (RINL) से कंपनी का बकाया (Trade Receivables) है। 30 जून, 2026 तक, RINL पर NMDC का ₹4,712.47 करोड़ बकाया था। इस रकम की वसूली में किसी भी तरह की देरी कंपनी के कैश फ्लो को प्रभावित कर सकती है।
इसके अलावा, कमोडिटी सेक्टर ग्लोबल प्राइस वोलेटिलिटी और डोमेस्टिक स्टील डिमांड के प्रति संवेदनशील रहता है। NMDC का रेवेन्यू सीधे आयरन ओर की कीमतों से जुड़ा है, इसलिए बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव सीधे कंपनी के मुनाफे पर असर डाल सकते हैं। निवेशक कंपनी की लागत नियंत्रण, बेहतर मूल्य प्राप्ति, स्टील प्लांट की प्रगति और ग्राहकों से बकाए की वसूली पर बारीकी से नजर रखेंगे।
