NMDC शेयर में सुस्ती: प्रोडक्शन रिकॉर्ड पर, लेकिन बिक्री पिछड़ी; कंपनी का नया दांव

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
NMDC शेयर में सुस्ती: प्रोडक्शन रिकॉर्ड पर, लेकिन बिक्री पिछड़ी; कंपनी का नया दांव

NMDC लिमिटेड के लिए यह समय थोड़ी चुनौती भरा है। कंपनी ने पहली तिमाही (Q1 FY27) में अपने प्रोडक्शन में **26%** की जोरदार बढ़ोतरी हासिल की, लेकिन बिक्री (offtake) में सिर्फ **1.8%** की मामूली बढ़त दर्ज की गई। इस प्रोडक्शन-सेल्स के अंतर के कारण कंपनी के नतीजे सपाट रहे।

प्रोडक्शन ज्यादा, बिक्री कम

NMDC ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 15.12 मिलियन टन लौह अयस्क का रिकॉर्ड प्रोडक्शन किया, जो पिछले साल की इसी अवधि से 26% ज्यादा है। मगर, इस दौरान बिक्री सिर्फ 1.8% बढ़कर 11.73 मिलियन टन रही। इस वजह से कंपनी के पास लौह अयस्क का स्टॉक बढ़ गया है, जो वर्किंग कैपिटल और भविष्य की कमाई के लिए एक जोखिम बन सकता है।

नतीजों पर दबाव

इस अंतर का असर कंपनी के वित्तीय नतीजों पर भी दिखा। NMDC का रेवेन्यू ₹6,795 करोड़ रहा और नेट प्रॉफिट ₹2,007 करोड़, जो पिछले साल की तुलना में सिर्फ 1.9% ज्यादा है। ज्यादा प्रोडक्शन के बावजूद, कंपनी का प्रॉफिट मार्जिन करीब 50 बेसिस पॉइंट घटकर 36.3% पर आ गया। लागत में बढ़ोतरी, जैसे कि वैधानिक शुल्क और रॉयल्टी, और लौह अयस्क की स्थिर कीमतों ने इस मार्जिन पर दबाव बनाया।

कीमतों में कटौती और भविष्य की योजना

मांग में आई इस सुस्ती को देखते हुए, कंपनी ने 8 अगस्त, 2026 से कीमतों में कटौती की है। अब लंप ओर (Lump Ore) ₹5,250 प्रति टन और फाइन (Fines) ₹4,500 प्रति टन के भाव पर मिलेगा। कंपनी का लक्ष्य वित्त वर्ष 27 तक 60 मिलियन टन और 2030 तक 100 मिलियन टन प्रोडक्शन का है। हालांकि, एक्सपर्ट्स को चिंता है कि क्या इतनी बढ़ी हुई सप्लाई को खपाने के लिए मांग पर्याप्त होगी, खासकर वैश्विक स्तर पर लौह अयस्क की कीमतों में नरमी और प्रमुख बाजारों में स्टील की मांग में कमी को देखते हुए।

कोयला माइनिंग पर फोकस

लौह अयस्क की कीमतों की अनिश्चितता से बचने और रेवेन्यू को बढ़ाने के लिए, NMDC अब कोयला माइनिंग पर भी जोर दे रही है। झारखंड में Tokisud North कोल माइन, जो जनवरी 2026 से चालू है, इस रणनीति का अहम हिस्सा है। कोयला माइनिंग में विस्तार करके कंपनी एक स्थिर रेवेन्यू बेस बनाना चाहती है, जो लौह अयस्क सेक्टर की चक्रीय प्रकृति पर कम निर्भर हो।

निवेशकों के लिए जोखिम

निवेशक कुछ खास जोखिमों पर नजर रख रहे हैं। वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में मानसून का असर प्रोडक्शन और लॉजिस्टिक्स पर पड़ सकता है, जिससे बिक्री कम हो सकती है। इसके अलावा, कंपनी पर कुछ बड़े टैक्स और बकाया देनदारियां भी हैं। इन सब के साथ-साथ संभावित रेगुलेटरी जांच भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.