Motilal Oswal ने NMDC पर 'Buy' रेटिंग बरकरार रखी है और ₹98 का टारगेट प्राइस दिया है। कंपनी ने रिकॉर्ड तिमाही प्रोडक्शन दर्ज किया है, लेकिन निवेशकों को मार्जिन पर दबाव और कर्नाटक टैक्स बिल जैसे बड़े देनदारियों पर नज़र रखनी चाहिए।
Motilal Oswal का बुलिश नज़रिया
ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal ने NMDC के शेयरों पर अपना भरोसा जताते हुए 'Buy' रेटिंग दी है। उन्होंने शेयर के लिए ₹98 का टारगेट प्राइस सेट किया है। यह टारगेट कंपनी के 2028 फाइनेंशियल ईयर के अनुमानित EV/EBITDA के 6.5 गुना वैल्यूएशन पर आधारित है। ब्रोकरेज फर्म सरकारी कंपनी के मजबूत मार्केट पोजीशन और प्रोडक्शन बढ़ाने की महत्वाकांक्षी योजनाओं को देखते हुए सकारात्मक (constructive) बनी हुई है।
Q1 FY27 के नतीजे और मार्जिन का गणित
फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में NMDC ने ₹6,795 करोड़ का रेवेन्यू और ₹2,007 करोड़ का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) दर्ज किया। कंपनी ने 15.1 मिलियन टन आयरन ओर का रिकॉर्ड प्रोडक्शन किया, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 26% ज्यादा है।
हालांकि, नतीजों में कुछ चिंताजनक बातें भी सामने आई हैं। कंपनी का EBITDA मार्जिन लगभग 41% रहा, जो मैनेजमेंट के 42-43% के गाइडेंस से कम है। यह मार्जिन दबाव मुख्य रूप से बढ़ी हुई स्टेट्यूटरी लेवी, रॉयल्टी पेमेंट्स और इनपुट कॉस्ट में बढ़ोत्तरी के कारण देखा गया।
प्रोडक्शन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बावजूद, इस तिमाही में सेल्स वॉल्यूम 11.8 मिलियन टन रहा, जो पिछली तिमाही की तुलना में 23% कम है। प्रोडक्शन और सेल्स के बीच इस गैप के कारण इन्वेंटरी बढ़ गई है, जिससे कंपनी की वर्किंग कैपिटल जरूरतें बढ़ गई हैं।
जोखिम और देनदारियां
ऑपरेशनल खर्चों के अलावा, निवेशकों को कुछ महत्वपूर्ण आकस्मिक देनदारियों (contingent liabilities) पर भी ध्यान देना चाहिए। इनमें सबसे प्रमुख कर्नाटक टैक्स बिल है, जिसकी कुल क्लेम राशि लगभग ₹15,786 करोड़ है। इसके अलावा, Rashtriya Ispat Nigam Limited (RINL) से मिलने वाले पैसे और Nagarnar Steel Limited (NSL) के बकाया भुगतान जैसे मामले भी शेयरधारकों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।
भविष्य की ग्रोथ के लिए क्या देखें?
आगे चलकर, कंपनी का लक्ष्य फाइनेंशियल ईयर 2030 तक अपनी क्षमता को 100 मिलियन टन प्रति वर्ष तक बढ़ाना है। इस विस्तार योजना के लिए लगातार कैपिटल खर्च और प्रभावी लागत प्रबंधन की आवश्यकता होगी। आने वाली तिमाहियों में निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या कंपनी अपनी इन्वेंटरी को कम करने के लिए सेल्स वॉल्यूम बढ़ा पाती है, टैक्स और रिसीवेबल लिटिगेशन से सफलतापूर्वक निपट पाती है, और बढ़ती स्टेट्यूटरी लागतों के प्रभाव को अपने प्रॉफिट मार्जिन पर नियंत्रित कर पाती है।
