सरकारी माइनिंग कंपनी NMDC ने निकल (Nickel) मार्केट में एंट्री करने की अपनी योजना को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है। कंपनी ने यह फैसला इंडोनेशिया से हो रही भारी ग्लोबल सप्लाई के चलते लिया है, जिसके कारण निकल की कीमतों में गिरावट आई है।
बाजार की स्थिति और कंपनी का फैसला
भारत की सबसे बड़ी आयरन ओर प्रोड्यूसर कंपनी NMDC ने निकल माइनिंग के सेक्टर में उतरने की अपनी महत्वाकांक्षी योजना को रोक दिया है। ग्लोबल मार्केट में निकल की अत्यधिक सप्लाई, खासकर इंडोनेशिया की तरफ से, कीमतों को नीचे बनाए हुए है। इस कारण कंपनी ने फिलहाल इस नए वेंचर में निवेश न करने का समझदारी भरा कदम उठाया है।
क्यों नहीं बढ़ी बात?
कंपनी की मुश्किलें सिर्फ मार्केट के आंकड़ों तक सीमित नहीं थीं। NMDC ने रशियन माइनिंग कंपनी Nornickel के साथ भी बातचीत की कोशिश की थी, ताकि सप्लाई या पार्टनरशिप को लेकर कोई रास्ता निकल सके। लेकिन, विदेशी संपत्तियों को हासिल करने की राह में आ रही लॉजिस्टिकल और पेमेंट संबंधी दिक्कतों के कारण यह बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
यह कदम NMDC की बदलती रणनीति को दर्शाता है। साल 2023 में सरकार द्वारा क्रिटिकल मिनरल्स को 'एसेंशियल' घोषित करने के बाद से कंपनी विविधता लाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन अब वे 'कैपिटल डिसिप्लिन' (Capital Discipline) को प्राथमिकता दे रहे हैं। निकल के बाजार में फिलहाल प्रॉफिट मार्जिन कम होने के कारण, कंपनी अपना पूरा ध्यान अपने कोर बिजनेस यानी आयरन ओर पर ही केंद्रित रख रही है।
EV बैटरी पर क्या होगा असर?
निकल का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बैटरी और हाई-ग्रेड स्टेनलेस स्टील बनाने में मुख्य रूप से होता है। फिलहाल भारत अपनी जरूरतों के लिए चीन, जापान, नॉर्वे और अमेरिका जैसे देशों पर निर्भर है। इंटरनेशनल निकल स्टडी ग्रुप का अनुमान है कि साल 2026 तक ग्लोबल मार्केट में निकल का सरप्लस बना रहेगा। ऐसे में भारत का निकल आयात पर निर्भरता कम करने का सपना अभी कुछ समय के लिए और खिंच सकता है।
