नतीजों का गणित (Financial Deep Dive)
कंपनी ने Q3 FY26 के लिए स्टैंडअलोन (Standalone) ₹7,485.55 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया है, जो पिछले साल की समान तिमाही (Q3 FY25) के ₹6,530.82 करोड़ की तुलना में 14.6% ज्यादा है. वहीं, इसी तिमाही में स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट (Net Profit) 10.5% घटकर ₹1,738.21 करोड़ रह गया, जबकि पिछले साल यह ₹1,943.84 करोड़ था.
9 महीने की अवधि (9 Months ended December 31, 2025) की बात करें तो स्टैंडअलोन रेवेन्यू 22% बढ़कर ₹20,380.56 करोड़ हो गया, और नेट प्रॉफिट 3.9% बढ़कर ₹5,401.59 करोड़ पर पहुंच गया.
कंसोलिडेटेड (Consolidated) नतीजों में भी रेवेन्यू 15.9% बढ़कर ₹7,610.79 करोड़ हुआ, लेकिन नेट प्रॉफिट 6.7% गिरकर ₹1,756.59 करोड़ पर आ गया. 9 महीने की अवधि में कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 22.6% बढ़कर ₹20,727.76 करोड़ और नेट प्रॉफिट 7.1% बढ़कर ₹5,423.19 करोड़ रहा.
प्रॉफिट पर दबाव क्यों? (Why the Pressure on Profit?)
तिमाही नतीजों से साफ है कि रेवेन्यू में बढ़ोतरी के बावजूद, खासकर स्टैंडअलोन स्तर पर, कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) पर दबाव देखा गया है. 9 महीने के आंकड़े प्रॉफिट ग्रोथ दिखा रहे हैं, लेकिन मौजूदा तिमाही का प्रदर्शन चिंता का विषय है.
बड़े जोखिम और भविष्य की राह (Major Risks and The Road Ahead)
टैक्स का 'बादल': कंपनी ने बताया है कि उस पर ₹15,165.06 करोड़ का भारी-भरकम संभावित टैक्स बिल (Tax Bill) मंडरा रहा है. यह कर्नाटक सरकार द्वारा रेट्रोस्पेक्टिव (Retrospective) यानी पिछली तारीख से लागू टैक्स की मांग है. यह कंपनी के लिए एक बड़ा वित्तीय जोखिम है.
अन्य देनदारियां: इसके अलावा, NMDC Steel Limited और RINL से मिलने वाले पैसे की रिकवरी (Recovery), KIADB को किए गए एडवांस का मुद्दा, कॉमन कॉज जजमेंट (Common Cause Judgement) के तहत ₹1,623.44 करोड़ की डिमांड और कथित मिनरल डिस्पैच (Mineral Dispatch) पर ₹1,620.50 करोड़ का जुर्माना जैसी अन्य देनदारियां भी कंपनी के सामने हैं.
भविष्य की योजना: इन सब चिंताओं के बीच, NMDC क्रिटिकल मिनरल्स के कारोबार में उतरने के लिए एक नई सब्सिडियरी (WOS) बना रही है, जो कंपनी के लिए एक रणनीतिक कदम है. निवेशकों की नजर अब इस नई इकाई के विकास पर और सबसे अहम, इन सभी कानूनी और टैक्स संबंधी मामलों के समाधान पर टिकी रहेगी.