Motilal Oswal Financial Services ने भारतीय निवेशकों के लिए सोने में निवेश की रणनीति बदल दी है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि फिलहाल सोने की कीमतों में **6-8%** की गिरावट आ सकती है, इसलिए एकमुश्त खरीद के बजाय किश्तों में खरीदारी (Staggered Buying) करना बेहतर होगा। फर्म के मुताबिक, सोने के भाव को भू-राजनीतिक तनाव से ज्यादा अमेरिकी ब्याज दरें और महंगाई प्रभावित कर रही हैं।
सोने में खरीदारी की सही रणनीति
Motilal Oswal Financial Services (MOFSL) ने भारतीय निवेशकों को सलाह दी है कि वे सोने में एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय, किश्तों में खरीद (Staggered Buying) करें। फर्म की H1 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा समय में कीमतों में आई तेजी का फायदा उठाने के लिए एकमुश्त निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।
क्यों किश्तों में खरीदें सोना?
MOFSL का अनुमान है कि अगले 12 से 15 महीनों में लंबी अवधि की तेजी से पहले, सोने की कीमतों में फिलहाल 6% से 8% तक की गिरावट आ सकती है। इस उतार-चढ़ाव का फायदा उठाने के लिए, फर्म ने भारतीय निवेशकों के लिए ₹1.30 लाख से ₹1.33 लाख प्रति 10 ग्राम के बीच का स्तर खरीदारी के लिए मुफीद बताया है। यह अनुमान रुपए-डॉलर की विनिमय दर (Exchange Rate) पर आधारित है। फर्म ने मीडियम-टर्म में सोने के लिए ₹1.68 लाख और ₹1.93 लाख प्रति 10 ग्राम के लक्ष्य तय किए हैं।
ब्याज दरें बनाम भू-राजनीति
MOFSL का मानना है कि निवेशक अक्सर भू-राजनीतिक खबरों पर ज्यादा ध्यान देते हैं, जिनका असर अस्थायी होता है। असल में, सोने की कीमतों को सबसे ज्यादा अमेरिकी महंगाई के आंकड़े (U.S. Inflation Data) और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें (Federal Reserve Interest Rate Policies) प्रभावित करती हैं। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सोना, जो कोई ब्याज नहीं देता, बॉन्ड या फिक्स्ड डिपॉजिट जैसे ब्याज देने वाले निवेशों की तुलना में कम आकर्षक हो जाता है। इसके विपरीत, जब दरें घटती हैं, तो सोने की मांग अक्सर बढ़ जाती है।
वित्तीय परिप्रेक्ष्य और जोखिम
ये सलाह ऐसे समय में आई है जब MOFSL अपनी वेल्थ और एसेट मैनेजमेंट सेवाओं का विस्तार कर रही है। कंपनी ने हाल ही में फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में अपने ऑपरेटिंग प्रॉफिट में 14% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की है, जिसका मुख्य कारण एसेट मैनेजमेंट बिजनेस रहा है। हालांकि, फर्म के शोध से निवेशकों को बाजार के उतार-चढ़ाव से निपटने में मदद मिलती है, लेकिन यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि वित्तीय सेवाएं बाजार की अस्थिरता के प्रति संवेदनशील होती हैं, और एसेट अंडर मैनेजमेंट (Assets Under Management) में कोई भी गिरावट कंपनी की मुनाफे को प्रभावित कर सकती है।
चांदी और बाजार का आउटलुक
फर्म ने यह भी बताया कि चांदी सोने की तुलना में अलग तरह के जोखिम पेश करती है। चांदी का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे उद्योगों में बड़े पैमाने पर होता है, इसलिए इसकी कीमतें ग्लोबल इंडस्ट्रियल एक्टिविटी के साथ-साथ इन्वेस्टमेंट फ्लो पर भी प्रतिक्रिया करती हैं। यही वजह है कि चांदी आम तौर पर सोने से ज्यादा वोलेटाइल (Volatile) मानी जाती है। निवेशकों को भविष्य में फेडरल रिजर्व की नीतिगत बदलावों, ग्लोबल लिक्विडिटी (Global Liquidity) और अमेरिकी महंगाई के रुझानों पर नजर रखनी चाहिए ताकि कीमतों में संभावित उतार-चढ़ाव का अंदाजा लगाया जा सके।
