Mirae Asset का कहना है कि कच्चे तेल के बाज़ार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रुकावटों और युद्ध से हो रहे रिफाइनरी नुकसान जैसे जोखिमों का पूरा अंदाज़ा नहीं लगा रहे हैं। ग्लोबल स्ट्रेटेजिक रिजर्व (strategic reserve) भी काफी कम हैं, इसलिए निवेशकों को कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए। इससे रिफाइनिंग मार्जिन और ईंधन की लागत पर दबाव पड़ सकता है, जो महंगाई और ऊर्जा पर निर्भर कंपनियों को प्रभावित करेगा।
Detailed Coverage
क्यों बढ़ सकता है तेल का दाम?
दुनिया भर के तेल बाज़ारों पर इस समय भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई की कमी का खतरा मंडरा रहा है, जिससे कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव आ सकता है। Mirae Asset की एक ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा बाज़ार कीमतें इन सप्लाई झटकों की संभावना को ठीक से नहीं दर्शा रही हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और ग्लोबल सप्लाई
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) तेल के वैश्विक परिवहन के लिए एक बेहद अहम रास्ता है। भले ही सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों में वैकल्पिक पाइपलाइनें मौजूद हैं, फिर भी रोज़ाना लाखों बैरल कच्चा तेल इसी समुद्री रास्ते से गुज़रता है। इस इलाके में लगातार जारी अस्थिरता इस सप्लाई को खतरे में डाल सकती है, एक ऐसा जोखिम जिसे बाज़ार फिलहाल कम आंक रहा है। निवेशकों के लिए इसका मतलब है कि अचानक सप्लाई में कमी का खतरा बढ़ गया है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी और अप्रत्याशित बढ़ोतरी हो सकती है।
युद्ध का रूसी इंफ्रास्ट्रक्चर पर असर
रूस-यूक्रेन युद्ध ने सीधे तौर पर प्रमुख प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाकर वैश्विक तेल सप्लाई को प्रभावित किया है। रूसी रिफाइनरियों पर लगातार हुए ड्रोन हमलों के कारण कच्चे तेल की प्रोसेसिंग क्षमता में कमी आई है, जिससे रूसी तेल उत्पादन ढाई साल के निचले स्तर पर पहुँच गया है। इस रुकावट का असर अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों पर भी पड़ रहा है, क्योंकि रूस से ईंधन का कम निर्यात यूरोप जैसे क्षेत्रों में सप्लाई को टाइट कर रहा है और प्रोडक्ट की कीमतें बढ़ा रहा है। रिफाइनिंग क्षमता में यह कमी "क्रैक स्प्रेड" (crack spreads) को बढ़ा रही है, जो कच्चे तेल और उससे बनने वाले रिफाइंड उत्पादों की कीमतों का अंतर है।
घटते भंडार का खेल
कीमतों में अस्थिरता बढ़ने का एक बड़ा कारण स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (strategic petroleum reserves) में आई भारी कमी है। मार्च से जून के बीच, OECD देशों ने इन आपातकालीन भंडारों से लगभग 70 करोड़ बैरल तेल निकाला था। जब ये भंडार बहुत निचले स्तर पर हों, तो वैश्विक बाज़ार के पास अप्रत्याशित सप्लाई झटकों को झेलने की पुरानी क्षमता नहीं रह जाती। नतीजतन, किसी भी नई रुकावट का तेल की कीमतों पर तत्काल और गंभीर असर पड़ने की संभावना है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
आने वाले समय में, तेल की कीमतें अस्थिर रहने की उम्मीद है। बाज़ार फिलहाल कई संभावित परिदृश्यों पर विचार कर रहा है, जिसमें भू-राजनीतिक संघर्षों की तीव्रता के आधार पर औसत कीमतों में उतार-चढ़ाव हो सकता है। निवेशकों को फारस की खाड़ी में समुद्री यातायात की स्थिरता, रूसी रिफाइनिंग क्षमता पर अपडेट और स्ट्रेटेजिक रिजर्व स्तरों में किसी भी बदलाव पर नज़र रखनी चाहिए। जो कंपनियाँ लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग या ट्रांसपोर्ट के लिए ईंधन पर बहुत ज़्यादा निर्भर हैं, उनके लिए सप्लाई की ये बाधाएँ परिचालन लागत को बढ़ा सकती हैं और भविष्य के मुनाफे के मार्जिन को प्रभावित कर सकती हैं।
