सोने की कीमतों में आई हालिया गिरावट को Mirae Asset ने लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए एक बड़ा मौका बताया है। हालांकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का दबाव बना हुआ है, लेकिन ग्लोबल सेंट्रल बैंकों की खरीदारी और भारत में त्योहारों की मांग इसे मजबूती दे रही है।
सोने की चाल पर एक्सपर्ट्स की नजर
Mirae Asset Investment Managers ने माना है कि सोने के भाव में आया सुधार निवेशकों के लिए एंट्री का सही समय हो सकता है। 8 अक्टूबर, 2026 तक सोना $4,141 प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा था, जबकि इस हफ्ते की शुरुआत में यह $4,110 के निचले स्तर तक भी गया था। साल की शुरुआत में दिखी तेजी के बाद अब रेट्स में करेक्शन देखने को मिल रहा है।
क्यों दबाव में है सोना?
सोने की चमक फीकी पड़ने की बड़ी वजह US Treasury Yields का बढ़ना है। 10-वर्षीय US Treasury नोट की यील्ड 5.2% के पार निकल गई है। जब सरकारी बॉन्ड्स पर फिक्स्ड और सुरक्षित रिटर्न ज्यादा मिलता है, तो सोने जैसे नॉन-यील्डिंग एसेट की ओर निवेशकों का आकर्षण कम हो जाता है, जिसका सीधा असर इसके भाव पर पड़ता है।
लंबी अवधि के लिए मजबूत आधार
बावजूद इसके, Mirae Asset का मानना है कि सोने के फंडामेंटल्स अभी भी मजबूत हैं। दुनिया भर के सेंट्रल बैंक अपनी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए तेजी से सोना जमा कर रहे हैं। भारत में आने वाले त्योहारी और वेडिंग सीजन (जैसे नवरात्रि और दिवाली) के दौरान फिजिकल डिमांड में जबरदस्त इजाफा होने की उम्मीद है, जो ग्लोबल उतार-चढ़ाव के बीच एक सपोर्ट लेवल का काम करेगा।
किन बातों का रखें ध्यान?
अगस्त महीने के आंकड़ों के मुताबिक, बाजार में 80-86% संभावना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व दिसंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। यदि फेड अपनी 'हॉकिश' नीति पर कायम रहता है, तो ब्याज दरें ऊंची बनी रह सकती हैं, जो सोने के लिए शॉर्ट-टर्म में चुनौती पैदा कर सकती हैं। साथ ही, मजबूत डॉलर भी ग्लोबल मार्केट में डिमांड को प्रभावित कर सकता है।
