जियोपॉलिटिकल रिस्क से कच्चे तेल में उबाल
कच्चे तेल (Brent crude) के दाम $115 प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। पिछले महीने की तुलना में यह 48% और पिछले साल इसी अवधि की तुलना में करीब 54% ज्यादा है। इस तेज उछाल की मुख्य वजह तेल उत्पादन और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे शिपिंग रूट्स में आई रुकावटें हैं। इससे महंगाई (Inflation) का डर फिर बढ़ गया है। एल्यूमीनियम (Aluminum) की कीमतों में भी करीब 6% का इजाफा हुआ है। ऐसे कमोडिटी प्राइस शॉक अक्सर धीमी आर्थिक ग्रोथ और ऊंची महंगाई वाले दौर, जिसे स्टैगफ्लेशन (Stagflation) कहते हैं, का संकेत देते हैं।
ग्लोबल मार्केट में गिरावट, निवेशकों में घबराहट
दुनिया भर के शेयर बाजारों (Equity Markets) में भारी गिरावट देखी जा रही है। ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से एस&पी 500 (S&P 500) इंडेक्स 7.4% गिर चुका है और अपने जनवरी के हाई से करीब 9% नीचे आ गया है। नैस्डैक 100 (Nasdaq 100) तो करेक्शन टेरिटरी में चला गया है, जो अपने हाल के हाई से 10% से ज्यादा नीचे बंद हुआ। एशियाई बाजारों का हाल भी बेहाल है; जापान का निक्केई 225 (Nikkei 225) 5.3% तक गिर गया, वहीं साउथ कोरिया का कोस्पी (Kospi) इंडेक्स भी काफी वोलेटाइल रहा और इसमें तेज गिरावट आई। अमेरिकी इक्विटी फ्यूचर्स में भी 0.5% की गिरावट देखी गई, जो इस रिस्क-ऑफ सेंटिमेंट को दर्शाता है।
फेडरल रिजर्व की चिंताएं बढ़ीं, रेट कट की उम्मीदें कम
फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) ने अपनी मार्च मीटिंग में ब्याज दरों (Interest Rates) को 3.50%-3.75% के बीच स्थिर रखा। हालांकि, फरवरी में सालाना कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) 2.4% रहा, जो फेड के 2% के लक्ष्य से ऊपर है। तेल के झटके से बिगड़ी यह लगातार महंगाई (Persistent Inflation) रेट कट की उम्मीदों को काफी कम कर रही है। इंटरेस्ट-रेट स्वैप्स (Interest-rate swaps) के मुताबिक, अब इस साल रेट कट की कोई संभावना नहीं दिख रही है, कुछ एनालिस्ट तो साल के अंत तक ब्याज दरें बढ़ाने की भी आशंका जता रहे हैं। ट्रेजरी यील्ड्स (Treasury yields) में इजाफा हुआ है, 10-साल की बॉन्ड यील्ड 4.44% के स्तर पर पहुंच गई, जो जुलाई 2025 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है।
मार्केट बंटा हुआ: एनर्जी चमकी, वैल्यूएशन चिंताजनक
कमोडिटी की कीमतों में इस उछाल ने मार्केट को दो हिस्सों में बांट दिया है। एनर्जी सेक्टर (Energy Sector) इस महीने 18% चढ़ा है, और जियोपॉलिटिकल जोखिमों के कारण डिफेंस स्टॉक्स (Defense Stocks) में भी तेजी आई है। वहीं, बढ़ते ईंधन की लागत और मंदी की आशंकाओं से कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी (Consumer Discretionary) सेक्टर दबाव में है। वैल्यूएशन (Valuations) भी चिंता का विषय हैं; एस&पी 500 का पिछले बारह महीनों का पी/ई रेश्यो (P/E ratio) करीब 28.26 है, जो इसके मॉडर्न-एरा औसत 20.6 से काफी ऊपर है। कोस्पी इंडेक्स, हाल की वोलेटिलिटी के बावजूद, 8.8 के 2026 पी/ई पर ट्रेड कर रहा है।
आउटलुक पर भू-राजनीतिक और आर्थिक जोखिमों का साया
पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव सप्लाई में लंबे समय तक रुकावटों का जोखिम पैदा करता है, जिससे महंगाई और बढ़ सकती है और अर्थव्यवस्थाएं स्टैगफ्लेशन (Stagflation) में जा सकती हैं। फेडरल रिजर्व के सामने जहां महंगाई को काबू में रखना है, वहीं आर्थिक ग्रोथ को भी सहारा देना है, जिससे एक अनिश्चित माहौल बना हुआ है। कुछ एनालिस्ट अगले बारह महीनों में एस&पी 500 में 28.9% के उछाल का अनुमान लगा रहे हैं, लेकिन यह उम्मीद मौजूदा मार्केट कंडीशन और सेक्टर-स्पेसिफिक दबावों के चलते सीमित है। तेल के झटकों के बाद मंदी और बियर मार्केट (Bear Market) का ऐतिहासिक पैटर्न बड़े जोखिमों की ओर इशारा करता है, खासकर अगर संघर्ष जारी रहा। नैस्डैक 100 का 200-दिन मूविंग एवरेज (200-day moving average) से नीचे टूटना एक बियरिश टेक्निकल सिग्नल है, जो अक्सर निवेशकों की और बिकवाली का संकेत देता है। निवेशक अब ऐसे परिदृश्य में हैं जहां बॉन्ड जैसे पारंपरिक सेफ एसेट भी बढ़ती यील्ड्स के कारण दबाव में हैं, और क्रेडिट स्प्रेड्स (Credit spreads) बढ़ने लगे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि ईरान युद्ध के बाद मार्केट की वर्तमान चाल कुवैत युद्ध के समान है, जो आगे और गिरावट का संकेत दे सकती है।
अनिश्चितता के बीच वोलेटिलिटी जारी रहने की उम्मीद
इंडस्ट्री एनालिस्ट अगले साल एस&पी 500 के लिए काफी तेजी की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन उन्हें बढ़ते जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और पॉलिसी बदलावों वाले मार्केट का सामना करना पड़ रहा है। आगे का रास्ता संघर्ष में कमी, स्थिर ऊर्जा कीमतों और सेंट्रल बैंकों की मंदी के बिना महंगाई को नियंत्रित करने की क्षमता पर निर्भर करेगा। फिलहाल, मार्केट इन विरोधी ताकतों को समझने की कोशिश कर रहा है, इसलिए वोलेटिलिटी (Volatility) के हाई बने रहने की उम्मीद है।