मिडिल ईस्ट संकट का भारत पर साया! **$98 अरब** से ज़्यादा के इंपोर्ट पर खतरा, सप्लाई चेन में मचेगा हाहाकार

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AuthorAditya Rao|Published at:
मिडिल ईस्ट संकट का भारत पर साया! **$98 अरब** से ज़्यादा के इंपोर्ट पर खतरा, सप्लाई चेन में मचेगा हाहाकार
Overview

मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे संघर्ष का भारत की आयात (Import) व्यवस्था पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। दिल्ली स्थित थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार, **2025** तक **$98.7 अरब** के सामानों का आयात प्रभावित हो सकता है। यह खतरा सिर्फ ऊर्जा तक सीमित नहीं है, बल्कि फर्टिलाइजर, इंडस्ट्रियल रॉ मटेरियल और डायमंड जैसे महत्वपूर्ण सामानों की सप्लाई चेन को भी झकझोर सकता है।

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मध्य पूर्व में चल रहा संघर्ष अब भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा सिरदर्द बनता जा रहा है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में पैदा हुई अस्थिरता के चलते 2025 तक भारत के $98.7 अरब के महत्वपूर्ण आयात (imports) पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। यह खतरा केवल कच्चे तेल और गैस तक ही सीमित नहीं है, बल्कि फर्टिलाइजर, प्लास्टिक, डायमंड और मेटल्स जैसे कई प्रमुख सेक्टर्स की सप्लाई चेन को भी बुरी तरह प्रभावित कर सकता है।

एनर्जी सेक्टर पर सबसे बड़ा खतरा

भारत अपनी एनर्जी ज़रूरतों के लिए काफी हद तक मिडिल ईस्ट पर निर्भर है। 2025 तक भारत $13.9 अरब की लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) का इंपोर्ट करेगा, जो इसके कुल एलपीजी इंपोर्ट का लगभग आधा है। ऐसे में, अगर सप्लाई में रुकावट आई तो लाखों घरों में कुकिंग फ्यूल की किल्लत हो सकती है, खासकर जब हमारे पास फिलहाल सिर्फ दो हफ़्ते का स्टॉक है।

इसी तरह, $1.9 अरब के रिफाइंड फ्यूल और $1.3 अरब के पेट्रोलियम कोक का इंपोर्ट भी खतरे में है। पेट्रोलियम कोक सीमेंट, एल्युमीनियम और पावर प्लांट्स के लिए एक ज़रूरी ईंधन है, जिसकी कमी प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ा सकती है। भारत अपनी 9.2 अरब डॉलर की एलएनजी (LNG) ज़रूरत का लगभग 70% इसी क्षेत्र से इंपोर्ट करता है, जिस पर भी सवालिया निशान लग गया है। Petronet LNG ने हाल ही में GAIL को जहाजों की आवाजाही पर लगी पाबंदियों के कारण सप्लाई रोक दी है।

क्रूड ऑयल और बढ़ती महंगाई का डर

भारत अपनी कुल क्रूड ऑयल (Crude Oil) ज़रूरतों का लगभग आधा, यानी $50.8 अरब का तेल मिडिल ईस्ट से मंगाता है। अगर सप्लाई लंबे समय तक बाधित हुई, तो पेट्रोल-डीज़ल के दाम तेज़ी से बढ़ सकते हैं। इससे ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ेगी और महंगाई (Inflation) को पंख लगेंगे। किसानों को भी डीजल पर चलने वाले पंपों और ट्रैक्टरों के लिए ज़्यादा पैसे चुकाने पड़ सकते हैं।

किसानों और फर्टिलाइजर पर असर

खेती-बाड़ी पर निर्भर किसानों के लिए यह एक बड़ी चिंता की बात है। भारत मिडिल ईस्ट से $3.7 अरब के फर्टिलाइजर (Fertilizers) का इंपोर्ट करता है, जो कुल इंपोर्ट का 30% से ज़्यादा है। नाइट्रोजन और मिक्स फर्टिलाइजर की कमी से खरीफ और रबी सीजन में क्रॉप यील्ड (Crop Yield) घट सकती है, सरकार पर सब्सिडी का बोझ बढ़ेगा और आखिरकार खाने-पीने की चीज़ों के दाम भी बढ़ेंगे।

डायमंड, प्लास्टिक और मेटल्स पर भी असर

भारत के डायमंड एक्सपोर्ट इंडस्ट्री पर भी इसका असर पड़ेगा, क्योंकि हम $6.8 अरब के रफ डायमंड (Rough Diamonds) इसी क्षेत्र से इंपोर्ट करते हैं। सप्लाई रुकने से सूरत जैसे प्रोसेसिंग हब्स में कामकाज प्रभावित हो सकता है। प्लास्टिक इंडस्ट्री के लिए ज़रूरी $1.2 अरब के पॉलीथीन पॉलीमर (Polyethylene Polymer) के इंपोर्ट पर भी खतरा है, जो पैकेजिंग से लेकर कंज्यूमर गुड्स तक में इस्तेमाल होता है।

कंस्ट्रक्शन सेक्टर में सीमेंट बनाने के लिए ज़रूरी लाइमस्टोन ($483 मिलियन) और जिप्सम जैसे ज़रूरी सामानों के इंपोर्ट पर भी असर पड़ेगा। साथ ही, स्टील इंडस्ट्री के लिए $190 मिलियन के डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (Direct Reduced Iron) और पावर व रिन्यूएबल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए $869 मिलियन के कॉपर वायर (Copper Wire) जैसे मेटल्स के इंपोर्ट पर भी असर दिखेगा।

GTRI के फाउंडर अजय श्रीवास्तव ने चेतावनी दी है कि अगर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ (Strait of Hormuz) से सप्लाई बाधित रही, तो एनर्जी से लेकर मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट इंडस्ट्री तक, हर जगह एक बड़ा सप्लाई शॉक (Supply Shock) देखने को मिल सकता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.