भारतीय मेटल शेयरों में शुक्रवार को जबरदस्त रिकवरी देखने को मिली। Nifty Metal इंडेक्स **2.5%** चढ़ा, जिसकी वजह ग्लोबल एल्युमीनियम की कीमतों में आई **5%** की तेजी रही। NALCO और Hindalco जैसी कंपनियों के शेयरों में खास उछाल दिखा।
मेटल सेक्टर में आई बहार
शुक्रवार को भारतीय मेटल सेक्टर में शानदार रिकवरी देखने को मिली। Nifty Metal इंडेक्स 2.5% बढ़कर 12,822 के स्तर पर पहुंच गया, जो कि व्यापक Nifty 50 की 1% की बढ़त से कहीं बेहतर था। इस तेजी में National Aluminium Company (NALCO), Hindalco Industries और Hindustan Copper जैसी बड़ी कंपनियों के शेयर करीब 4% तक उछले। Tata Steel, Jindal Steel & Power और JSW Steel जैसी कंपनियों के शेयरों में भी लगभग 2.5% की बढ़त दर्ज की गई।
ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में क्या हुआ?
इस सेक्टर-व्यापी तेजी का मुख्य कारण ग्लोबल बेस मेटल की कीमतों में आई रिकवरी है। एल्युमीनियम, जो इन कंपनियों के लिए एक अहम उत्पाद है, पिछले छह ट्रेडिंग सेशन में अपनी हालिया गिरावट से 5% से ज्यादा सुधर गया है। जून में अमरीकी टैरिफ और प्रॉफिट-बुकिंग के चलते मेटल शेयरों में करीब 20% की भारी गिरावट आई थी, लेकिन अब हालात बदलते दिख रहे हैं।
वेयरहाउस इन्वेंटरी का खेल
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि कीमतों में यह उछाल सप्लाई की चिंताओं के चलते आया है। London Metal Exchange (LME) के रजिस्टर्ड वेयरहाउस में एल्युमीनियम का स्टॉक साल की शुरुआत से 40% से ज्यादा गिर चुका है। यह सितंबर 2022 के बाद का सबसे निचला स्तर है। कम इन्वेंटरी अक्सर यह संकेत देती है कि मांग सप्लाई से ज्यादा हो सकती है, जो मेटल की कीमतों को सहारा दे सकती है।
नतीजों का मौसम और आगे की राह
अब जब मेटल कंपनियां अपने तिमाही नतीजे पेश करने वाली हैं, तो निवेशक इस बात का आकलन कर रहे हैं कि कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का उनके मुनाफे पर क्या असर पड़ेगा। जून तिमाही के नतीजे यह बताएंगे कि कंपनियों ने पिछली तीन महीनों की प्राइस वोलेटिलिटी का सामना कैसे किया। JSW Steel 17 जुलाई को अपने तिमाही नतीजे जारी करेगा, जो निवेशकों के लिए एक अहम पड़ाव होगा।
ब्रोकरेज फर्मों का रुख अभी सतर्क है, लेकिन वे बाजार के इन बदलावों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि जिन कंपनियों का एल्युमीनियम और सल्फ्यूरिक एसिड की LME-लिंक्ड कीमतों पर ज्यादा एक्सपोजर है, उन्हें नतीजों में फायदा हो सकता है, बशर्ते इनपुट कॉस्ट कंट्रोल में रहे। हालांकि, मेटल कंपनियों को हमेशा कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, ग्लोबल ट्रेड पॉलिसी और कंस्ट्रक्शन, ऑटोमोटिव और पैकेजिंग जैसे एंड-यूजर इंडस्ट्रीज की डिमांड जैसे जोखिमों का सामना करना पड़ता है। इस तेजी की स्थिरता इस बात पर निर्भर करेगी कि ग्लोबल वेयरहाउस की सप्लाई की कमी जारी रहती है या नहीं, और एंड-यूजर की मांग मजबूत बनी रहती है।
