ग्लोबल कमोडिटी की कमजोरी से मेटल शेयरों में भूचाल
यह बड़ी गिरावट सिर्फ भारतीय मेटल शेयरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्लोबल कमोडिटी मार्केट की बढ़ती कमजोरी का सीधा असर है। पिछले 2 ट्रेडिंग सेशन से यह बिकवाली जारी है, जिसने निवेशकों को चिंता में डाल दिया है।
इंटरनेशनल मार्केट में क्या हुआ?
सबसे बड़ा कारण इंटरनेशनल मार्केट में कमोडिटी की कीमतों में आई तेज गिरावट है। सोमवार, 2 फरवरी 2026 को कॉपर (तांबा) की कीमत 3.3% गिरकर $12,722 प्रति टन पर आ गई। यह पिछले गुरुवार को $14,500 के रिकॉर्ड हाई से एक बड़ी गिरावट है।
इस गिरावट की एक और वजह चीन का मेटल ट्रेडिंग मार्केट है, जहां ट्रेडर्स को $144 मिलियन से ज्यादा का भारी नुकसान हुआ है। एक मामले में 200 मिलियन युआन से ज्यादा की क्षतिपूर्ति मांगी गई है। इस संकट की जड़ें मेटल डीलर Xu Maohua से जुड़ी हैं, और इसमें SDIC Commodities Co. जैसी बड़ी कंपनियां भी शामिल हैं। इस घटना से छिपे हुए वित्तीय जोखिमों का डर बढ़ गया है और रेगुलेटरी जांच की मांग भी उठ रही है।
भारतीय शेयरों में भारी बिकवाली और मार्केट कैप का नुकसान
इन ग्लोबल वजहों का असर भारतीय मेटल शेयरों पर साफ दिख रहा है। Nifty Metal इंडेक्स के शेयरों ने पिछले 2 ट्रेडिंग सेशन में लगभग ₹2 लाख करोड़ का बाजार पूंजीकरण (Market Cap) गंवा दिया है।
- Hindustan Copper इस बिकवाली में सबसे ज्यादा टूटा, रविवार, 1 फरवरी को शेयर 19% लुढ़क गया। इस दौरान करीब 51.1 मिलियन शेयर ट्रेड हुए, जिनकी वैल्यू लगभग ₹3,018 करोड़ थी।
- Hindustan Zinc भी रविवार को 13% गिरा, जिससे शुक्रवार और रविवार को इसका मार्केट कैप ₹60,000 करोड़ से ज्यादा घट गया।
- Vedanta के शेयर 10% गिरे, और पिछले हफ्ते के मुकाबले इसका मार्केट वैल्यू ₹54,000 करोड़ कम हो गया, जो हाल ही में ₹3 लाख करोड़ के वैल्यूएशन के करीब था।
कीमती धातुओं और डॉलर का खेल
सिल्वर (चांदी) सोमवार को फ्लैट रही, लेकिन शुरुआती कारोबार में 6% टूट गई थी। यह $80 प्रति औंस के नीचे चली गई थी, जबकि पहले यह $120 के पार थी। गोल्ड (सोना) भी करीब 3% नीचे कारोबार कर रहा था।
ऊपर से, अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से डॉलर-डिनोमिनेटेड कमोडिटीज पर और दबाव पड़ा। डॉलर इंडेक्स 97 के पार निकल गया, जो बाजार की उम्मीदों के अनुरूप है। मजबूत डॉलर आमतौर पर कमोडिटी कीमतों पर दबाव डालता है।
निवेशकों की घबराहट और आगे का रास्ता
बाजार में अनिश्चितता का माहौल साफ दिख रहा है। Nifty Metal इंडेक्स लगातार दूसरे दिन गिरा है, जो व्यापक बाजार की बड़ी गिरावट का संकेत है। चीन के ट्रेडिंग संकट और डॉलर की मजबूती को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि मेटल सेक्टर का प्रदर्शन आगे चलकर चीन के संकट के समाधान और ग्लोबल ब्याज दरों की दिशा पर निर्भर करेगा। हाल के दिनों में इन विशिष्ट कंपनियों के लिए कोई खास पॉजिटिव खबर नहीं थी, और बाजार का पूरा ध्यान कमोडिटी कीमतों और ग्लोबल आर्थिक संकेतों पर टिका है।