Gold, Silver Prices: मार्केट में हड़कंप! एक्सचेंजों ने बढ़ाई मार्जिन, कीमती धातुओं में भारी गिरावट

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Gold, Silver Prices: मार्केट में हड़कंप! एक्सचेंजों ने बढ़ाई मार्जिन, कीमती धातुओं में भारी गिरावट
Overview

Gold और Silver के निवेशकों के लिए बड़ी खबर है। भारत के MCX और ग्लोबल CME Group जैसे प्रमुख कमोडिटी एक्सचेंजों ने Gold और Silver फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स पर मार्जिन आवश्यकताओं में भारी बढ़ोतरी की है। यह कदम **5-6 फरवरी, 2026** से लागू हुआ है, जिसका मकसद कीमती धातुओं में दिख रही अत्यधिक अस्थिरता (Volatility) को कंट्रोल करना, सट्टेबाजी पर लगाम लगाना और जोखिम को कम करना है। Silver पर यह मार्जिन Hike और भी ज्यादा है, जो ट्रेडर्स को अधिक पूंजी लगाने पर मजबूर कर रहा है और मार्केट लिक्विडिटी पर असर डाल सकता है।

एक्सचेंजों का बड़ा कदम, मार्केट में हड़कंप

बाजार में बढ़ती गड़बड़ी को काबू में करने के लिए, भारत के मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) और इंटरनेशनल CME Group ने Gold और Silver फ्यूचर्स के लिए मार्जिन की रकम में ज़बरदस्त इजाफा किया है। ये बदलाव 5 और 6 फरवरी, 2026 से लागू हुए हैं। MCX ने Gold फ्यूचर्स पर मार्जिन में 1% (5 फरवरी) और फिर 2% (6 फरवरी) की बढ़ोतरी की है, जिससे कुल अतिरिक्त मार्जिन 3% हो गया है। वहीं, Silver फ्यूचर्स पर तो और भी बड़ी मार पड़ी है, जहाँ 4.5% (5 फरवरी) और फिर 2.5% (6 फरवरी) का अतिरिक्त मार्जिन लगाया गया है, यानी कुल 7% की बढ़ोतरी।

CME Group के COMEX एक्सचेंज ने भी अपना शिकंजा कस दिया है। 6 फरवरी से, Gold फ्यूचर्स के लिए मार्जिन की ज़रूरतें नॉन-हाइटेन्ड रिस्क प्रोफाइल वालों के लिए 8% से बढ़कर 9% और हाइटेन्ड रिस्क प्रोफाइल वालों के लिए 8.8% से बढ़कर 9.9% कर दी गई हैं। Silver, जो अपनी ज़्यादा अस्थिरता के लिए जाना जाता है, उसमें और भी भारी बढ़ोतरी देखी गई। नॉन-हाइटेन्ड रिस्क मार्जिन 15% से 18% और हाइटेन्ड रिस्क मार्जिन 16.5% से 19.8% तक पहुँच गए हैं। ये अतिरिक्त मार्जिन सामान्य मार्जिन के ऊपर लगाए गए हैं और ये साफ संकेत देते हैं कि एक्सचेंज लीवरेज (Leverage) को कंट्रोल करने और अत्यधिक सट्टेबाजी को रोकने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव को बढ़ाती है।

अस्थिरता की वजह: डॉलर का मज़बूत होना और सट्टेबाजी

कीमती धातुओं में इस तूफानी गिरावट की मुख्य वजहें कई फैक्टर्स का एक साथ आना थीं। सबसे बड़ा कारण अमेरिका के फेडरल रिजर्व (Fed) के अगले चेयरमैन के तौर पर केविन वॉर्श (Kevin Warsh) का नाम सामने आना था। वॉर्श को हॉक (Hawkish) माना जाता है, जो सख्त मॉनेटरी पॉलिसी, मज़बूत अमेरिकी डॉलर और फेड की बैलेंस शीट कम करने के पक्षधर हैं। यह बाज़ार की उम्मीदों के बिल्कुल विपरीत है, जो फिलहाल आसान नीतियों को जारी रखने की उम्मीद कर रहे थे। इस नॉमिनेशन से अमेरिकी डॉलर और मज़बूत हुआ, जिसने डॉलर में ट्रेड होने वाली Gold और Silver जैसी कमोडिटीज पर दबाव बनाया। डॉलर के मज़बूत होने से ये धातुएँ दूसरे देशों के खरीदारों के लिए महंगी हो जाती हैं, जिससे ग्लोबल डिमांड कम हो जाती है।

इसके अलावा, कीमतों में भारी गिरावट से पहले, खासकर Silver में, एशियाई बाजारों से आए सट्टेबाजी वाले फंड्स (Speculative Inflows) और मोमेंटम ट्रेडिंग (Momentum Trading) के चलते एक ज़बरदस्त तेजी (Parabolic Rally) देखने को मिली थी। इससे मार्केट ओवरबॉट (Overbought) हो गया था, जो किसी भी झटके के लिए संवेदनशील था। हालाँकि पहले जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताओं (Geopolitical Uncertainties) के चलते Gold की सेफ-हेवन (Safe-haven) डिमांड बढ़ी थी, लेकिन वॉर्श के नॉमिनेशन और उसके बाद हुए मार्जिन एक्शन के बाद बाज़ार की कहानी तेज़ी से बदल गई।

मार्जिन कॉल्स का लिक्विडिटी पर असर

एक्सचेंजों द्वारा किए गए इन ज़बरदस्त मार्जिन हाइक्स ने कीमतों में गिरावट को और तेज़ कर दिया। जैसे-जैसे मार्जिन की ज़रूरतें बढ़ीं, लीवरेज्ड ट्रेडर्स (Leveraged Traders) को तुरंत ज़्यादा मार्जिन जमा करने का नोटिस (Capital Calls) आया। इन कॉल्स को पूरा न कर पाने की स्थिति में उन्हें अपनी पोजीशंस को भारी नुकसान पर जल्दी-जल्दी बेचना पड़ा। इस तरह की बिकवाली के चक्र (Cascade of Forced Selling) ने कीमतों पर नीचे की ओर दबाव और बढ़ा दिया, जिससे यह एक सेल्फ-रिनफोर्सिंग साइकिल (Self-reinforcing cycle) बन गया और मार्केट में सुधार (Market Correction) और गहरा हो गया। ऐतिहासिक रूप से, ऐसे मार्जिन इंक्रीज़, जिनका मकसद बाज़ारों को स्थिर करना होता है, वे जोखिम बांटने (Risk-sharing) के कामों में बाधा डाल सकते हैं और मार्केट लिक्विडिटी (Market Liquidity) को कम कर सकते हैं, जिससे छोटे निवेशकों के लिए अपनी पोजीशंस बनाए रखना ज़्यादा मुश्किल हो जाता है। इन हाइक्स की आक्रामकता (Aggressive nature) यह दर्शाती है कि एक्सचेंज अत्यधिक लीवरेज से उत्पन्न होने वाले सिस्टमैटिक रिस्क (Systemic Risk) को लेकर कितने चिंतित हैं।

एनालिस्ट्स का आउटलुक: सावधानी के साथ थोड़ी रिकवरी

कीमती धातुओं की कीमतों में आई भारी गिरावट के बाद आंशिक सुधार के बावजूद, बाज़ार का सेंटिमेंट (Sentiment) अभी भी सतर्क बना हुआ है। एनालिस्ट्स का कहना है कि Gold का वैल्यूएशन (Valuation) अभी भी बढ़ा हुआ है, और कुछ मॉडल्स के अनुसार यह फंडामेंटल (Fundamental) वजहों से काफी ऊपर ट्रेड कर रहा है। Silver, जो अपनी ज़्यादा वोलेटिलिटी (Higher Beta) के लिए जाना जाता है, उसने इस उतार-चढ़ाव को और बढ़ा दिया है और रिस्क एवर्जन (Risk Aversion) के दौर में यह और तेज़ी से गिरने के लिए ज़्यादा संवेदनशील है।

हालांकि जनवरी 2026 में Gold ETF में रिकॉर्ड इनफ्लो (Record Inflows) जारी रहा, जो कि जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताओं के बीच इंस्टीट्यूशनल डिमांड (Institutional Demand) और सेफ-हेवन की तलाश से प्रेरित था, लेकिन इस ज़बरदस्त अस्थिरता ने कुछ स्ट्रैटेजिस्ट्स (Strategists) को धातुओं की हेजिंग (Hedging) के तौर पर भूमिका पर सवाल उठाने पर मजबूर कर दिया है। कुछ लोग लॉन्ग-टर्म पोटेंशियल (Long-term potential) के लिए Bitcoin को प्राथमिकता दे रहे हैं। 2026 के अधिकांश समय के लिए Silver की कीमतों का औसत $75-$85 प्रति औंस रहने का अनुमान है, जो इसकी ऐतिहासिक अस्थिरता और मीन रिवर्जन (Mean Reversion) की संभावना को स्वीकार करता है। कमोडिटी मार्केट के व्यापक संदर्भ में, एक्सचेंजों द्वारा बढ़ती अस्थिरता के बीच कड़े रिस्क मैनेजमेंट प्रोटोकॉल (Risk Management Protocols) लागू किए जा रहे हैं। Gold और Silver के लॉन्ग-टर्म ड्राइवर्स, जैसे Silver की इंडस्ट्रियल डिमांड और Gold के लिए सेंट्रल बैंकों का विविधीकरण (Diversification), अभी भी प्रासंगिक हैं, लेकिन मौजूदा माहौल अत्यधिक सट्टा पोजिशनिंग (Speculative Positioning) और एक्सचेंज-चालित लिक्विडिटी की कमी (Liquidity Constraints) से चिह्नित है।

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