360 ONE AMC के मेयूर पटेल का कहना है कि मैन्युफैक्चरिंग अगले दशक में भारत का मुख्य ग्रोथ इंजन (Growth Engine) बनेगा। डेटा सेंटर और ग्रीन एनर्जी में भारी निवेश की उम्मीद है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से कमाई पर असर पड़ सकता है, लेकिन फाइनेंशियल ईयर के दूसरी छमाही में रिकवरी की उम्मीद है।
मैन्युफैक्चरिंग का बढ़ता दबदबा
360 ONE AMC के प्रेसिडेंट और फंड मैनेजर (लिस्टेड इक्विटीज) मेयूर पटेल ने बताया कि भारत की लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी (Long-Term Investment Strategy) में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अब सबसे आगे है। फर्म का मानना है कि रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy), पावर इक्विपमेंट (Power Equipment) और सेमीकंडक्टर प्रोडक्शन (Semiconductor Production) जैसे सेक्टर इस ग्रोथ स्टोरी का अहम हिस्सा होंगे। सरकारी पहलों से डोमेस्टिक कैपेसिटी (Domestic Capacity) बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, जिससे इंडस्ट्रियल कंपनियों को लगातार बढ़ावा मिलेगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर का विस्तार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) के बढ़ते इस्तेमाल से भारत में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर (Digital Infrastructure) की भारी जरूरत पैदा हो गई है। अनुमान है कि अगले 5 से 7 सालों में देश को 14 गीगावाट (Gigawatt) डेटा सेंटर कैपेसिटी (Data Centre Capacity) बनाने के लिए करीब ₹10 लाख करोड़ के निवेश की आवश्यकता होगी। इस बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट से पावर-संबंधित प्रोडक्ट्स की डिमांड में भारी बढ़ोतरी होगी। केबल (Cable), वायर (Wire), ट्रांसफार्मर (Transformer), स्विचगियर (Switchgear) और पावर डिस्ट्रीब्यूशन इक्विपमेंट (Power Distribution Equipment) बनाने वाली कंपनियों को इसका सीधा फायदा मिलेगा।
शॉर्ट-टर्म अस्थिरता से निपटना
लॉन्ग-टर्म पॉजिटिव आउटलुक (Long-Term Positive Outlook) के बावजूद, मौजूदा ग्लोबल जियोपॉलिटिकल अस्थिरता (Global Geopolitical Instability) के कारण मार्केट कुछ चुनौतियों का सामना कर रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से जून तिमाही में कंपनियों की कमाई पर दबाव पड़ सकता है। हालांकि, फर्म को उम्मीद है कि फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही तक कमाई में रिकवरी (Recovery) देखने को मिलेगी। निवेशकों को यह समझने की जरूरत है कि ये अस्थायी लागत संबंधी दिक्कतें हैं या बिजनेस साइकिल (Business Cycle) के लिए कोई बड़ा स्ट्रक्चरल रिस्क (Structural Risk)।
फाइनेंशियल सेक्टर और फंड की पोजीशनिंग
फाइनेंशियल सेक्टर (Financial Sector) अभी भी ब्रॉडर मार्केट इंडेक्स (Broader Market Index) का एक अहम हिस्सा है, हालांकि पोर्टफोलियो एलोकेशन (Portfolio Allocation) में इसे फिलहाल मामूली ओवरवेट (Overweight) रखा गया है। प्राइवेट बैंक्स (Private Banks) में हेल्दी क्रेडिट ग्रोथ (Healthy Credit Growth) और स्टेबल एसेट क्वालिटी (Stable Asset Quality) के कारण अच्छी संभावनाएं दिख रही हैं। वहीं, नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज़ (NBFCs) कमर्शियल व्हीकल साइकिल (Commercial Vehicle Cycle) में तेजी का फायदा उठा रही हैं। इसके अलावा, बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी (Liquidity) FCNR(B) डिपॉजिट्स (Deposits) से आने वाले इनफ्लो (Inflows) से सपोर्टेड रहने की उम्मीद है।
360 ONE AMC का इन्वेस्टमेंट अप्रोच (Investment Approach) स्टॉक्स को सेक्युलर (Secular), साइक्लिकल (Cyclical), डिफेंसिव (Defensive) या वैल्यू ट्रैप (Value Traps) में बांटने के फ्रेमवर्क (Framework) का इस्तेमाल करता है। यह स्ट्रेटेजी (Strategy) फंड को मार्केट-कैप (Market-Cap) के सख्त नियमों के बजाय बॉटम-अप एनालिसिस (Bottom-Up Analysis) के आधार पर लार्ज (Large), मिड (Mid) और स्मॉल-कैप (Small-Cap) स्टॉक्स के बीच स्विच करने की सुविधा देती है। फिलहाल, फंड का लगभग आधा पोर्टफोलियो स्मॉल और मिड-कैप कंपनियों में है। निवेशकों के लिए मुख्य बात यह होगी कि मैन्युफैक्चरिंग कंपनियाँ एक्जीक्यूशन कॉस्ट (Execution Costs) को कितनी प्रभावी ढंग से मैनेज करती हैं और इंफ्रास्ट्रक्चर व एनर्जी की अनुमानित मांग को पूरा करने के लिए अपनी प्रोडक्शन कैपेसिटी (Production Capacity) को कैसे बढ़ाती हैं।
