मलेशिया की प्लांटेशन मिनिस्टर Noraini Ahmad **27 सितंबर** को भारत आ रही हैं। इस दौरे का मकसद सस्टेनेबल पाम ऑयल ट्रेड को बढ़ावा देना है। गौर करने वाली बात यह है कि साल 2026 के शुरुआती **8 महीनों** में मलेशिया से भारत को होने वाले पाम ऑयल एक्सपोर्ट में **40.4%** का बड़ा उछाल देखा गया है, जो सीधे तौर पर एफएमसीजी (FMCG) और रिफाइनरी कंपनियों के कॉस्ट स्ट्रक्चर को प्रभावित करता है।
मलेशिया की प्लांटेशन और कमोडिटी मंत्री, Noraini Ahmad, 27 सितंबर से 1 अक्टूबर 2026 तक भारत के दौरे पर रहेंगी। इस दौरे का मुख्य एजेंडा दोनों देशों के बीच कमर्शियल पार्टनरशिप को मजबूत करना और सस्टेनेबल पाम ऑयल की सप्लाई को बेहतर बनाना है। आंकड़ों की बात करें तो 2026 के शुरुआती आठ महीनों में मलेशिया से भारत को 2.26 मिलियन टन पाम ऑयल एक्सपोर्ट हुआ है, जो पिछले साल की तुलना में 40.4% अधिक है।
रिफाइनरी और FMCG कंपनियों पर असर
भारत के कुल एडिबल ऑयल इंपोर्ट में पाम ऑयल की हिस्सेदारी लगभग 51% है। Adani Wilmar, Patanjali Foods जैसी दिग्गज कंपनियों और अन्य रिफाइनरी प्लेयर्स का कामकाज सीधे तौर पर इन आयातित कच्चे माल की कीमतों पर टिका है। यदि इस ट्रेड मिशन से सप्लाई स्थिर होती है या स्पेशलिटी फैट्स की लागत घटती है, तो कंपनियों के मार्जिन में सुधार देखने को मिल सकता है। हालांकि, ग्लोबल कीमतों में उतार-चढ़ाव और सरकार द्वारा समय-समय पर बदले जाने वाले इंपोर्ट ड्यूटी नियम इन कंपनियों के मुनाफे पर बड़ा असर डाल सकते हैं।
बेंगलुरु और मुंबई में हाई-लेवल मीटिंग्स
Malaysian Palm Oil Council द्वारा आयोजित इस दौरे में बेंगलुरु और मुंबई में कई बड़े इवेंट्स होंगे। इसमें केवल कच्चे माल (Raw Commodities) ही नहीं, बल्कि ओलेओकेमिकल्स और डिजिटल एग्रीकल्चर पर भी चर्चा होगी। Hindustan Unilever और Britannia जैसी FMCG कंपनियां, जो अपने प्रोडक्ट्स में पाम ऑयल का उपयोग करती हैं, इस बात पर नजर रखेंगी कि क्या यह दौरा सस्टेनेबल सप्लाई चेन को और अधिक मजबूत बना पाएगा।
अंत में, 30 सितंबर को मुंबई में होने वाली Globoil India 2026 कॉन्फ्रेंस में मंत्री का संबोधन काफी महत्वपूर्ण होगा। Solvent Extractors’ Association of India के साथ उनकी मुलाकात के बाद कोई भी नया रेगुलेटरी बदलाव या ट्रेड एग्रीमेंट निवेशकों के लिए बड़ा ट्रिगर साबित हो सकता है।
