Maharashtra Sugarcane Protest: पुणे-बेंगलुरु हाईवे जाम, सप्लाई चेन पर मंडराया बड़ा खतरा

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Maharashtra Sugarcane Protest: पुणे-बेंगलुरु हाईवे जाम, सप्लाई चेन पर मंडराया बड़ा खतरा

पुणे-बेंगलुरु नेशनल हाईवे पर किसानों का अनिश्चितकालीन प्रदर्शन शुरू हो गया है। गन्ने के बढ़े हुए दाम की मांग को लेकर हो रहे इस विरोध से जरूरी सामानों की सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका है, साथ ही चीनी मिलों का कामकाज भी ठप पड़ गया है।

हाईवे पर बढ़ता तनाव

स्वाभिमानी शेतकारी संगठन के नेतृत्व में किसान किणी टोल प्लाजा पर डटे हुए हैं। इस विरोध-प्रदर्शन की वजह से कराड और कागल के बीच ट्रैफिक पूरी तरह चरमरा गया है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे पुणे और मुंबई जैसे बड़े शहरों में दूध और सब्जियों जैसी जरूरी चीजों की सप्लाई भी रोक देंगे।

क्या है आर्थिक गतिरोध?

किसान गन्ने की पहली किस्त के तौर पर ₹4,500 प्रति टन की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि मौजूदा FRP (फेयर एंड रेम्युनरेटिव प्राइस) लागत को पूरा करने के लिए काफी नहीं है। वहीं, चीनी मिलों के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण है क्योंकि सरकार ने एथेनॉल प्रोडक्शन के लिए गन्ने के रस और सिरप के इस्तेमाल पर कई पाबंदियां लगा दी हैं। यह वही कमाई का जरिया था, जिससे मिलें किसानों को ज्यादा भुगतान करने में सक्षम होती थीं।

मिलों पर ऑपरेशनल रिस्क

महाराष्ट्र देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्यों में से एक है। यदि यह गतिरोध जारी रहता है और क्रशिंग सीजन शुरू होने में देरी होती है, तो मिलों को भारी नुकसान हो सकता है। समय पर कटाई न होने से गन्ने की क्वालिटी गिर जाती है, जिससे रिकवरी रेट कम हो जाता है। साथ ही, इस बात का भी डर है कि किसान अपना गन्ना पड़ोसी राज्य कर्नाटक की मिलों को भेज सकते हैं, जिससे महाराष्ट्र की मिलों की कैपेसिटी यूटिलाइजेशन पर सीधा असर पड़ेगा।

निवेशकों को अब राज्य सरकार की मध्यस्थता और क्रशिंग सीजन के शुरू होने की तारीख पर नजर रखनी होगी। एथेनॉल पॉलिसी में किसी भी बड़े बदलाव या सरकारी राहत से ही मिलों की वित्तीय स्थिति में सुधार की उम्मीद की जा सकती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.