महाराष्ट्र सरकार ने 2026-27 के गन्ना पेराई सीजन को 15 अक्टूबर से शुरू करने का आदेश दिया है। इसका उद्देश्य त्योहारी सीजन से पहले बाजार में चीनी की सप्लाई को सुचारू रखना है, हालांकि मिल मालिकों को रिकवरी रेट घटने का डर सता रहा है।
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की चीनी मिलों को 2026-27 के गन्ना पेराई सीजन की शुरुआत 15 अक्टूबर, 2026 से करने का आधिकारिक निर्देश दिया है। पारंपरिक रूप से यह सीजन नवंबर में शुरू होता है, लेकिन त्योहारी सीजन की मांग को देखते हुए सरकार ने इसे पहले शुरू करने का फैसला किया है ताकि बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और कीमतों में उतार-चढ़ाव न हो।
बाजार में कीमतों का हाल
अगस्त 2026 में चीनी की एक्स-मिल कीमतें रिकॉर्ड ₹65-67 प्रति किलो तक पहुंच गई थीं। हालांकि, सरकार द्वारा 10 लाख टन रॉ शुगर के ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट की घोषणा के बाद स्थिति में सुधार हुआ और सितंबर की शुरुआत तक कीमतें ₹43-46 प्रति किलो के दायरे में आ गई हैं।
ऑपरेशनल रिस्क और रिकवरी रेट
इस जल्दी शुरुआत से चीनी मिलों के सामने एक बड़ी चुनौती 'शुगर रिकवरी रेट' को लेकर है। विशेषज्ञों के अनुसार, समय से पहले कटाई के कारण गन्ने की परिपक्वता पूरी नहीं हो पाती, जिससे रिकवरी रेट में 1% से 1.5% की गिरावट आ सकती है। रिकवरी में यह कमी सीधे तौर पर मिलों के मुनाफे और ऑपरेटिंग मार्जिन पर असर डालेगी।
राहत की उम्मीद
बढ़ती लागत और कम यील्ड की स्थिति को देखते हुए, इंडस्ट्री बॉडीज ने सरकार से सॉफ्ट-लोन स्कीम के तहत इंटरेस्ट सब्सिडी को फिर से शुरू करने की मांग की है। यह वित्तीय मदद मिलों की लिक्विडिटी बनाए रखने और किसानों को समय पर भुगतान करने में सहायक होगी।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
आने वाले समय में निवेशकों को मिलों के एक्चुअल रिकवरी डेटा पर बारीकी से नजर रखनी होगी। साथ ही, ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट प्रोग्राम की सफलता और सरकार द्वारा घोषित होने वाली किसी भी नई इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम पर नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि ये फैक्टर्स मिलों की बैलेंस शीट को स्टेबल रखने में बड़ी भूमिका निभाएंगे।
