Macquarie की चेतावनी: ईरान संकट से कच्चे तेल में $200 का भयानक उछाल संभव!

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AuthorNeha Patil|Published at:
Macquarie की चेतावनी: ईरान संकट से कच्चे तेल में $200 का भयानक उछाल संभव!
Overview

दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल का खतरा मंडरा रहा है। Macquarie Group ने चेतावनी दी है कि ईरान संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) लंबे समय तक बंद रहने की स्थिति में तेल की कीमतें **$200** प्रति बैरल तक पहुँच सकती हैं। ट्रेडर पहले से ही ब्रेंट क्रूड (Brent crude) के **$150** तक जाने की उम्मीद लगा रहे हैं, जो बाजार में गहरी चिंता का संकेत है।

Macquarie की $200 प्रति बैरल की चेतावनी

Macquarie Group ने एक गंभीर चेतावनी जारी की है। कंपनी का कहना है कि अगर ईरान से जुड़ा संघर्ष लंबा खिंचता है और महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) दूसरी तिमाही तक बंद रहता है, तो कच्चे तेल की कीमतें अप्रत्याशित रूप से बढ़कर $200 प्रति बैरल तक पहुँच सकती हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस सबसे खराब स्थिति (worst-case scenario) की 40% संभावना है।

ट्रेडर लगा रहे ब्रेंट क्रूड पर दांव

बाजार में चिंता के संकेत साफ दिख रहे हैं। ट्रेडर तेजी से पोजीशन बना रहे हैं और इस बात पर दांव लगा रहे हैं कि ब्रेंट क्रूड (Brent crude) अप्रैल के अंत तक $150 प्रति बैरल का आंकड़ा पार कर जाएगा। $150 के अप्रैल कॉल ऑप्शन (call options) में ओपन इंटरेस्ट (open interest) लगभग दस गुना बढ़ गया है, जो निकट भविष्य में कीमतों में बड़े झटके की मजबूत उम्मीदों को दर्शाता है। यदि ऐसा होता है, तो यह 2008 के ब्रेंट के रिकॉर्ड $147.50 को भी पार कर जाएगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य: वैश्विक सप्लाई का अहम रास्ता

वैश्विक तेल प्रवाह के लिए एक महत्वपूर्ण 'चोकपॉइंट' (chokepoint) यानी अहम मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य, इस चिंता का केंद्र बना हुआ है। तेहरान (Tehran) की कार्रवाइयों से आपूर्ति बाधित होने का डर है, जिससे बड़े ऊर्जा संकट की आशंकाएं बढ़ गई हैं। यहां तक कि कूटनीतिक स्तर पर थोड़ी सी भी नरमी के संकेत डेरिवेटिव्स बाजारों (derivatives markets) को शांत करने में नाकाम रहे हैं, जहां ट्रेडर आगे और अधिक अस्थिरता (volatility) के लिए तैयार हैं।

तेल की ऊंची कीमतों का आर्थिक असर

$150 या $200 तक तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को नाटकीय रूप से बदल देगी। वर्तमान स्तरों पर वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 2.5-3% रहने वाला तेल खर्च लगभग दोगुना हो सकता है। इससे तेल खर्च वैश्विक जीडीपी के ऐतिहासिक रूप से खतरनाक 5-6% के दायरे में पहुँच जाएगा, जो आर्थिक विस्तार को पटरी से उतार सकता है और बजट व सप्लाई चेन की पूरी तरह से पुनर्मूल्यांकन (repricing) को मजबूर कर सकता है। कीमतों में किसी भी वृद्धि के स्थायी आर्थिक नुकसान को उसकी ऊंचाई से ज्यादा, उसके टिके रहने की अवधि (duration) तय करेगी।

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