सरकारी कंपनी MOIL Limited ने भारत की बढ़ती स्टील डिमांड को पूरा करने के लिए अपना बड़ा रोडमैप तैयार किया है। कंपनी **2031** तक उत्पादन क्षमता को **3.5 मिलियन टन** तक बढ़ाएगी, जिसके लिए इंटरनेशनल माइनिंग एसेट्स और लो-ग्रेड ओर रिकवरी पर दांव लगाया जा रहा है।
उत्पादन बढ़ाने की रणनीति
स्टील मिनिस्ट्री के अधीन आने वाली MOIL Limited ने एक आक्रामक योजना बनाई है। फिलहाल कंपनी का प्रोडक्शन 2.5 मिलियन टन है, जिसे बढ़ाकर 2031 तक 3.5 मिलियन टन तक पहुँचाया जाएगा। कंपनी पुरानी और खराब क्वालिटी के वेस्ट से 0.5 मिलियन टन मैंगनीज निकालने के लिए नई बेनेफिसिएशन टेक्नोलॉजी (beneficiation technology) का इस्तेमाल करेगी। इसके अलावा, गुजरात मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर कंपनी घरेलू स्तर पर भी एक्सप्लोरेशन तेज कर रही है।
ग्लोबल मार्केट पर नज़र
अपनी सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए MOIL अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एसेट अधिग्रहण की तैयारी में है। कंपनी घाना, मोजाम्बिक और जाम्बिया में माइनिंग प्रोजेक्ट्स पर बातचीत कर रही है ताकि वैश्विक कीमतों के उतार-चढ़ाव से बचा जा सके। साथ ही, निकेल जैसे क्रिटिकल मिनरल्स पर भी कंपनी की नजरें टिकी हैं।
सेक्टर के सामने चुनौतियां
बड़े लक्ष्यों के बावजूद माइनिंग सेक्टर में कुछ दिक्कतें बरकरार हैं। इंडियन फेरो अलॉय प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन का कहना है कि सरकार की नीलामी प्रक्रिया (auction framework) में भारी प्रीमियम के कारण कई प्रोजेक्ट्स आर्थिक रूप से घाटे का सौदा साबित हो रहे हैं, जिससे माइनिंग ब्लॉक खाली पड़े रह जाते हैं। इसके अलावा, गोवा में माइनिंग बंद होने से भी घरेलू सप्लाई पर असर पड़ा है।
निवेशकों के लिए अहम बातें
निवेशकों को कंपनी के मुनाफे और मार्जिन पर कड़ी नज़र रखनी चाहिए। एक्सपेंशन के दौरान लागत का प्रबंधन, बेनेफिसिएशन प्रोजेक्ट्स की सफलता और विदेशी अधिग्रहणों में मिलने वाली मंजूरी ही तय करेगी कि कंपनी का लॉन्ग-टर्म परफॉरमेंस कैसा रहेगा।
