नतीजों में दिखी मुनाफे पर मार
Q4 FY26 में MOIL का नेट प्रॉफिट ₹92.6 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के ₹115.65 करोड़ से 20% कम है। यह गिरावट तब आई जब कंपनी का रेवेन्यू मामूली 2.5% बढ़कर ₹433.39 करोड़ हुआ। असल वजह कुल खर्चों में 6.2% का इजाफा रहा, जो पिछले साल के ₹332.96 करोड़ से बढ़कर ₹353.53 करोड़ हो गया। इस बढ़ी हुई लागत के कारण EBITDA मार्जिन भी घटकर 31.3% रह गया, जो पिछले साल 32.2% था।
वैल्यूएशन और सेक्टर का हाल
नतीजों के बाद, 30 अप्रैल 2026 को MOIL के शेयर 5.5% गिरकर ₹314.9 पर आ गए। यह बेंचमार्क Sensex के 1.5% गिरने से कहीं ज्यादा है। कंपनी का मौजूदा P/E (Price-to-Earnings) रेश्यो लगभग 23-24 गुना है। यह वैल्यूएशन कोल इंडिया ( 9.75 गुना) और NMDC ( 11.73 गुना) जैसी बड़ी सरकारी माइनिंग कंपनियों से ज्यादा है, जबकि गुजरात मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (GMDC) के 23.80 गुना के करीब है। हालांकि, भारतीय मेटल और माइनिंग सेक्टर में घरेलू मांग और कमोडिटी की बढ़ती कीमतों से रिकवरी की उम्मीद है, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन की दिक्कतें इनपुट कॉस्ट बढ़ाकर अस्थिरता पैदा कर रही हैं।
पुरानी खदानों का बढ़ता बोझ
MOIL के मुनाफे पर एक बड़ा बोझ उसकी पुरानी खदानें हैं, जो करीब एक सदी पुरानी हैं। इन पुरानी खदानों में आधुनिक माइनिंग ऑपरेशन्स की तुलना में रखरखाव और खनन की लागत काफी ज्यादा आती है, जो सीधे तौर पर कुल खर्चों में बढ़ोतरी का कारण बनी है। पिछले पांच सालों से कंपनी पर कोई कर्ज नहीं है, लेकिन अपनी इन्फ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने के लिए बड़े निवेश की जरूरत होगी, जो कंपनी के फाइनेंस पर दबाव डाल सकता है। FY26 में कंपनी का सेल्स वॉल्यूम पिछले साल के लगभग बराबर ही रहा, उत्पादन में भी मामूली बढ़ोतरी हुई। ऐसे में, मौजूदा इन्फ्रास्ट्रक्चर की दिक्कतों को दूर किए बिना परिचालन को बढ़ाना लागत-दक्षता को और बिगाड़ सकता है। कोल इंडिया और NMDC जैसे बड़े खिलाड़ियों की तुलना में, MOIL कमोडिटी की कीमतों या नई तकनीक अपनाने में कम सौदेबाजी की शक्ति रखता है।
एनालिस्ट्स की राय और आगे की राह
इन परिचालन चुनौतियों और हालिया नतीजों के बावजूद, एनालिस्ट्स का सामान्य रूझान पॉजिटिव बना हुआ है। मौजूदा भाव से शेयर में और तेजी की उम्मीद है। हालांकि, बाजार की प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि MOIL को लागत प्रबंधन और पुरानी इन्फ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने के लिए एक स्पष्ट रणनीति पेश करने की जरूरत है। यह कदम कंपनी की लाभप्रदता बनाए रखने और 2030 तक 35 लाख टन मैंगनीज अयस्क के उत्पादन जैसे अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।
