डिजिटल गोल्ड से मुनाफे का नया जरिया
MMTC-PAMP के लिए डिजिटल गोल्ड प्रोडक्ट अब सिर्फ एक प्रोडक्ट नहीं, बल्कि मुनाफे का एक बड़ा जरिया बन गया है। यह कंपनी के मार्जिन का 20% हिस्सा बन चुका है। कंपनी के सीईओ समित गुहा के अनुसार, भले ही कुल रेवेन्यू में इसका हिस्सा कम हो, लेकिन हर ट्रांज़ैक्शन पर मिलने वाला प्रॉफिट पारंपरिक रिफाइनिंग बिजनेस से कहीं ज़्यादा है। जनवरी 2026 में डिजिटल गोल्ड की खरीदारी ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए और यह ₹3,926 करोड़ तक पहुंच गई, जो कि जनवरी 2025 के ₹762 करोड़ की तुलना में लगभग पांच गुना ज़्यादा है। यह उपभोक्ताओं के बीच इसकी बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है। कंपनी, जो सालाना 80 टन से ज़्यादा सोना और 120 टन चांदी रिफाइन करती है, अब इस डिजिटल प्लेटफॉर्म को मेक्सिको, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देशों में ले जाने की योजना बना रही है, ताकि भारत में मिली सफलता को इन देशों में भी दोहराया जा सके, जहां डिजिटल भुगतान और आसान निवेश की मांग ज़्यादा है।
डिजिटल गोल्ड की बढ़ती लोकप्रियता के पीछे क्या है?
डिजिटल गोल्ड की ज़बरदस्त ग्रोथ का मुख्य कारण मोबाइल पेमेंट ऐप्स के साथ इसका आसान इंटीग्रेशन है। 90% से ज़्यादा बिक्री यूपीआई (UPI) के ज़रिए हो रही है। 'फ्रैक्शनल ओनरशिप' (Fractional Ownership) की सुविधा, जिसमें सिर्फ ₹1 से भी निवेश शुरू किया जा सकता है, इसे ज़्यादा से ज़्यादा निवेशकों के लिए सुलभ बनाती है। सुविधा, सुरक्षा का एहसास और फिजिकल गोल्ड में कन्वर्ट कराने का विकल्प इसकी लोकप्रियता बढ़ा रहा है। ग्लोबल गोल्ड की कीमतों में आई तेज़ी ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई है। भू-राजनीतिक तनाव और कमजोर होते रुपये के चलते 2025 में कीमतें लगभग 67% बढ़ीं और 2026 की शुरुआत में भी इनका बढ़ना जारी रहा। हालांकि, ऊंची कीमतों के कारण 2025 में भारत में सोने की कुल मांग थोड़ी कम हुई, लेकिन डिजिटल गोल्ड जैसे निवेश की मांग में इज़ाफा हुआ। उम्मीद है कि भारत में डिजिटल गोल्ड मार्केट 2023-24 के लगभग ₹4,000 करोड़ से बढ़कर 2026-27 तक ₹9,841 करोड़ तक पहुंच जाएगा, जो सालाना 30-35% की दर से बढ़ेगा।
रेगुलेटरी मुश्किलों से निपटना
मजबूत बिक्री के बावजूद, डिजिटल गोल्ड का क्षेत्र फिलहाल किसी स्पष्ट रेगुलेशन के दायरे में नहीं आता है। नवंबर 2025 में, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने चेतावनी दी थी कि डिजिटल गोल्ड प्रोडक्ट सेबी के तहत रेगुलेटेड नहीं हैं और निवेशक सुरक्षा नियमों से बाहर हैं। सेबी ने इसमें काउंटरपार्टी, ऑपरेशनल, स्टोरेज और पारदर्शिता जैसे जोखिमों की ओर इशारा किया था, और कहा था कि सिक्योरिटीज मार्केट के संरक्षण नियम इन पर लागू नहीं होते। MMTC-PAMP के सीईओ ने यह स्पष्ट किया है कि ग्राहकों की होल्डिंग्स को रिडेम्पशन (Redemption) के लिए कंपनी के प्लेटफॉर्म पर ट्रांसफर किया जा सकता है, जिससे निवेशकों की कुछ चिंताएं दूर करने का प्रयास किया गया है। हालांकि, रेगुलेटरी निगरानी की कमी इस इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है। बता दें कि डिजिटल गोल्ड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर SafeGold ने फाइनेंशियल ईयर 2024 में ₹6,100 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया था।
MMTC लिमिटेड और बाज़ार का संदर्भ
MMTC लिमिटेड, जिसकी MMTC-PAMP में 26% हिस्सेदारी है, का फाइनेंशियल प्रोफाइल मिला-जुला है। मार्च 2026 तक, MMTC लिमिटेड एक स्मॉल-कैप कंपनी है जिसका मूल्यांकन ₹7,800-8,300 करोड़ के बीच है। इसका प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो लगभग 31.25-45.81 है, जो संभावित रूप से ऊंची वैल्यूएशन का संकेत देता है, और कुछ एनालिस्ट्स इसे ओवरवैल्यूड भी मानते हैं। कंपनी ने पिछले पांच सालों में सेल्स ग्रोथ में भारी गिरावट (-86.5%) देखी है, ऑपरेटिंग कैश फ्लो नकारात्मक रहा है, और ₹742.24 करोड़ की बड़ी कंटिंजेंट लायबिलिटीज़ (contingent liabilities) भी हैं। MMTC लिमिटेड कोई डिविडेंड भी नहीं देती है। इसके विपरीत, व्यापक भारतीय कीमती धातुओं का बाजार (precious metals market) मजबूत है, जिसके 2030 तक USD 125,691.8 मिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जो सालाना 12.2% की दर से बढ़ रहा है। हालांकि डिजिटल गोल्ड कुल निवेश का एक छोटा हिस्सा है, लेकिन यह तेज़ी से बढ़ रहा है। 2026 की शुरुआत में ईरान और इज़राइल से जुड़े तनाव जैसी भू-राजनीतिक घटनाओं ने यूएई से सोने की आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित किया, जिससे भारतीय आयात प्रभावित हुए और कीमतों में उतार-चढ़ाव आया। मार्च 2026 के अंत तक सोने की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई।
डिजिटल गोल्ड का आउटलुक
MMTC-PAMP का मेक्सिको, इंडोनेशिया और मलेशिया में अंतरराष्ट्रीय विस्तार, वैश्विक डिजिटल रुझानों का लाभ उठाने का एक रणनीतिक प्रयास है। डिजिटल गोल्ड से मिलने वाले हाई मार्जिन और बढ़ते बाज़ार से कंपनी को ग्रोथ की अच्छी संभावनाएँ दिख रही हैं। हालांकि, निवेशकों को भारत में रेगुलेटरी माहौल की अनिश्चितता और इसकी शेयरधारक MMTC लिमिटेड की वित्तीय स्थिति पर भी विचार करना चाहिए। MMTC-PAMP का भविष्य इन रेगुलेटरी मुद्दों को संभालने, अपनी अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति बनाने और पारदर्शी संचालन बनाए रखने पर निर्भर करेगा, जो डिजिटल गोल्ड मार्केट के औपचारिकताकरण को प्रभावित कर सकता है। तुलना के लिए, गोल्ड ईटीएफ (Gold ETFs) और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (EGRs) जैसे रेगुलेटेड विकल्पों में निवेशक सुरक्षा मिलती है, जिसकी कमी फिलहाल डायरेक्ट डिजिटल गोल्ड प्रोडक्ट्स में है।