MCX Gold-Silver में बड़ी उथल-पुथल: ट्रेडर्स करेक्शन के लिए तैयार रहें

COMMODITIES
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
MCX Gold-Silver में बड़ी उथल-पुथल: ट्रेडर्स करेक्शन के लिए तैयार रहें
Overview

MCX पर सोना और चांदी के वायदा कारोबार में जबरदस्त अस्थिरता देखी जा रही है। ट्रेडर्स जहाँ एक तरफ लगातार आ रहे अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों पर नजर रख रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बदलते भू-राजनीतिक जोखिमों का भी आकलन कर रहे हैं। हफ्ते के बीच में सोने और चांदी में थोड़ी रिकवरी जरूर आई, लेकिन दोनों हफ्ते के हिसाब से गिरावट पर हैं और इनके टेक्निकल सपोर्ट लेवल कड़ी परीक्षा से गुजर रहे हैं।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

महंगाई और भू-राजनीति का डबल अटैक

कीमती धातुओं का बाजार इस समय एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जहाँ जबरदस्त वोलैटिलिटी (Volatility) देखी जा रही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अप्रैल के अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों ने निवेशकों की उम्मीदों को झटका दिया है। इन आंकड़ों के बाद फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) द्वारा जल्द ब्याज दरों में कटौती की संभावना काफी कम हो गई है, जिससे सोना और चांदी के वायदा भावों (Futures) में एक नई री-प्राइसिंग (Repricing) शुरू हो गई है।

हाल ही में सोने ने लगातार दो दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ा है, लेकिन इस हफ्ते के लिए इसका ओवरऑल ट्रेंड रक्षात्मक बना हुआ है। यह बाजार की उस चिंता को दर्शाता है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं। अमेरिकी डॉलर (US Dollar) की मजबूती ने इस दबाव को और बढ़ा दिया है, जिससे सोने-चांदी जैसी नॉन-यील्डिंग एसेट्स (Non-yielding Assets) के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं, जो आमतौर पर मॉनेटरी ईजिंग (Monetary Easing) से फायदा उठाती हैं।

टेक्निकल सपोर्ट पर मंडराता खतरा

टेक्निकल इंडिकेटर्स (Technical Indicators) बताते हैं कि मौजूदा प्राइस एक्शन सपोर्ट ज़ोन (Support Zones) के प्रति बहुत संवेदनशील है। MCX गोल्ड (Gold) में, जो फिलहाल अहम लेवल्स के ऊपर कंसॉलिडेट (Consolidate) करने की कोशिश कर रहा है, साप्ताहिक टाइमफ्रेम (Weekly Timeframe) पर लगातार साइडवेज-टू-बेयरिश (Sideways-to-bearish) बायस दिखा है। मार्केट पार्टिसिपेंट्स 1,51,000 के लेवल पर कड़ी नजर रखे हुए हैं, क्योंकि इस लेवल से नीचे जाने पर एक बड़ी स्ट्रक्चरल करेक्शन (Structural Correction) आ सकती है।

इसी तरह, चांदी (Silver) को ऊपरी स्तरों पर रेजिस्टेंस (Resistance) का सामना करना पड़ रहा है। हालिया प्राइस स्विंग्स (Price Swings) एक कमजोर रिकवरी का संकेत दे रहे हैं। चांदी का औद्योगिक मांग पर निर्भर होना, व्यापक आर्थिक सुस्ती के साथ टकरा रहा है, जिससे इंट्राडे (Intraday) में बड़ी उठापटक देखी जा रही है। इससे शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स (Short-term Traders) के लिए कोई स्पष्ट दिशा तय करना मुश्किल हो रहा है।

गोल्ड-सिल्वर रेशियो (Gold-Silver Ratio) एक महत्वपूर्ण पैरामीटर बना हुआ है। अगर इसमें तेजी से गिरावट आती है, तो यह संकेत देगा कि चांदी अपनी पारंपरिक मौद्रिक हेज (Monetary Hedge) की भूमिका के बजाय औद्योगिक सेंटिमेंट (Industrial Sentiment) के आधार पर कारोबार कर रही है।

स्ट्रक्चरल कमजोरी और भारतीय बाजार का हाल

पिछले साल के अधिकांश समय में हावी रहा बुलिश नैरेटिव (Bullish Narrative) अब एक रियलिटी चेक का सामना कर रहा है। कमोडिटी स्पेस (Commodity Space) के अन्य प्रतिस्पर्धियों के विपरीत, जिन्हें टेंजिबल सप्लाई-डिमांड टाइटनेस (Tangible Supply-Demand Tightness) से फायदा होता है, सोना और चांदी को स्पेकुलेटिव अनवाइंडिंग (Speculative Unwinding) और 2025 के रिकॉर्ड प्रदर्शन के बाद प्रॉफिट-टेकिंग (Profit-taking) से जूझना पड़ रहा है।

इसके अलावा, भारतीय घरेलू बाजार हाल ही में हुए इंपोर्ट ड्यूटी हाइक्स (Import Duty Hikes) के असर से जूझ रहा है। इन रेगुलेटरी उपायों (Regulatory Measures) ने इंटरनेशनल स्पॉट प्राइस (International Spot Prices) और लोकल फ्यूचर्स (Local Futures) के बीच एक अंतर पैदा कर दिया है, जिससे भारी डिस्काउंट (Discount) देखने को मिल रहा है। यह इस बात का संकेत है कि मौजूदा प्राइस लेवल्स पर फिजिकल डिमांड (Physical Demand) कमजोर है और 'बाय-द-डिप' (Buy-the-dip) का उत्साह कम हो रहा है।

आगे क्या?

ब्रोकरेज कंसेंसस (Brokerage Consensus) और टेक्निकल एनालिस्ट (Technical Analysts) बंटे हुए हैं क्योंकि बाजार मिड-ईयर FOMC साइकिल (FOMC Cycle) के करीब पहुंच रहा है। हालांकि सेंट्रल बैंक द्वारा लंबी अवधि में सोने की खरीदारी जैसे स्ट्रक्चरल ड्राइवर्स (Structural Drivers) बरकरार हैं, लेकिन नियर-टर्म पाथ (Near-term Path) ऊर्जा-संचालित महंगाई के जोखिमों और पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनावों से धुंधला हो गया है।

निवेशकों को तब तक कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव की उम्मीद करनी चाहिए जब तक कि फेडरल रिजर्व की पॉलिसी को लेकर कोई स्पष्ट दिशा सामने न आ जाए। पिछले साल के अपट्रेंड (Uptrend) के संभावित रिजम्पशन (Resumption) के लिए सोना अपनी वर्तमान बेस को बनाए रखने और चांदी के महत्वपूर्ण ट्रेंडलाइन सपोर्ट (Trendline Support) को बनाए रखने की क्षमता निर्णायक कारक होगी।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.