गुरुवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का भाव **₹1.41 लाख** प्रति 10 ग्राम पर स्थिर रहा, जबकि चांदी की कीमतों में **0.65%** की गिरावट दर्ज की गई। चांदी **₹2.16 लाख** प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही है। ये उतार-चढ़ाव अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों को यथावत रखने के फैसले के बाद देखने को मिल रहे हैं।
फेड दरों और डॉलर का असर
बाजार की नजरें अमेरिकी फेडरल रिजर्व के हालिया फैसले पर हैं, जिसने ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया है। आमतौर पर, ऊंची ब्याज दरें सोने जैसी गैर-उपज वाली संपत्तियों को कम आकर्षक बना देती हैं। इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर की मजबूती भी सोने की कीमतों को एक सीमित दायरे में बनाए हुए है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जो अक्सर कीमतों में बढ़ोतरी को सीमित करता है। निवेशक वर्तमान में अमेरिकी व्यक्तिगत उपभोग व्यय (PCE) मुद्रास्फीति डेटा का इंतजार कर रहे हैं, जिसे फेडरल रिजर्व की भविष्य की ब्याज दर नीति का एक प्रमुख संकेतक माना जाता है।
भू-राजनीतिक तनाव के बीच सुरक्षित निवेश की मांग
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और अनिश्चितता के बीच सोना अभी भी एक सुरक्षित निवेश (safe-haven asset) के रूप में अपनी भूमिका से समर्थन प्राप्त कर रहा है। वैश्विक अस्थिरता के समय में, निवेशक अक्सर अपनी संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए सोने में निवेश करते हैं। हालांकि फेडरल रिजर्व का मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने पर ध्यान केंद्रित करना कीमतों में वृद्धि के लिए एक चुनौती पेश करता है, लेकिन सुरक्षा की यह मांग बाजार को संतुलित करने में मदद कर रही है। वैश्विक स्तर पर सोने की कीमत $4,080 प्रति औंस के स्तर से ऊपर बनी हुई है, जो आर्थिक नीति और भू-राजनीतिक जोखिम के बीच के तनाव को दर्शाती है।
भारतीय बाजार का संदर्भ और त्योहारी मांग
भारत में, बाजार आगामी त्योहारी और शादी के मौसम की ओर बढ़ रहा है, जो पारंपरिक रूप से सोने की भौतिक खपत की अवधि होती है। ऊंची कीमतों के बावजूद, घरेलू निवेश मांग में कुछ लचीलापन देखा गया है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के हालिया आंकड़ों से पता चला है कि अप्रैल-जून तिमाही में भारत की कुल सोने की मांग साल-दर-साल 6% घटकर 131.4 टन रह गई, जिसका आंशिक कारण सीमा शुल्क में वृद्धि और मौसमी सुस्ती है। हालांकि, इसी अवधि में, सोने के बिस्किट और सिक्कों की मांग में 9% की वृद्धि हुई, और गोल्ड ईटीएफ (Gold ETFs) में लगातार निवेश देखा गया। यह बताता है कि गहनों के खुदरा खरीदार कीमतों में वृद्धि के प्रति संवेदनशील हो सकते हैं, लेकिन निवेश-केंद्रित मांग आर्थिक अनिश्चितता से बचाव के रूप में सक्रिय बनी हुई है। निवेशक इस साल के शेष समय के लिए मांग की दिशा को समझने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अगली नीति घोषणा और वैश्विक मुद्रास्फीति रिपोर्टों पर नजर रखेंगे।
