MCX Gold, Silver Price: डॉलर कमजोर, भारतीय बाज़ार में सोना-चांदी हुए महंगे

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AuthorAditya Rao|Published at:
MCX Gold, Silver Price: डॉलर कमजोर, भारतीय बाज़ार में सोना-चांदी हुए महंगे

सोमवार को भारतीय वायदा बाज़ार MCX पर सोना और चांदी की कीमतों में उछाल देखा गया। सोने का भाव **₹1.43 लाख** प्रति 10 ग्राम और चांदी **₹2.18 लाख** प्रति किलो के करीब पहुंच गई। डॉलर के कमजोर होने और भू-राजनीतिक तनाव के कारण कीमती धातुओं को सहारा मिला है।

डॉलर के गिरने से सोने-चांदी को मिली बढ़त

सोमवार को भारतीय कमोडिटी बाज़ार में कीमती धातुओं, सोना और चांदी, की कीमतों में मजबूती देखी गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर, अक्टूबर महीने के सोने के कॉन्ट्रैक्ट्स 0.18% चढ़कर ₹1.43 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहे थे। वहीं, सितंबर डिलीवरी वाली चांदी की फ्यूचर प्राइस 0.53% बढ़कर ₹2.18 लाख प्रति किलो तक पहुंच गई।

यह घरेलू तेज़ी अंतरराष्ट्रीय बाज़ार की चाल से मेल खाती है। कॉमेक्स पर सोने का भाव $4,100 प्रति औंस के ऊपर बना हुआ है, जबकि चांदी में 1% से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई है। इस उछाल का मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर का कमजोर होना है, जिससे अन्य मुद्राओं वाले निवेशकों के लिए सोना-चांदी जैसी कीमती धातुएं सस्ती हो जाती हैं और इनकी मांग बढ़ जाती है।

वैश्विक कारकों का असर

कीमतों पर एनर्जी सेक्टर का भी असर दिख रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है, जिसका एक कारण अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक प्रगति भी है। चूंकि एनर्जी की लागत महंगाई का एक बड़ा हिस्सा होती है, तेल की कीमतों में नरमी से बाज़ार की कुछ चिंताएं कम हुई हैं। हालांकि, भू-राजनीतिक घटनाएँ अभी भी कीमती धातुओं को पारंपरिक 'सेफ-हेवन' एसेट के रूप में सहारा दे रही हैं।

फेडरल रिज़र्व की नीतियों पर नज़र

हालांकि महंगाई को लेकर चिंताएं थोड़ी कम हुई हैं, लेकिन निवेशक अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की ब्याज दरों को लेकर सतर्क हैं। फेडरल रिज़र्व ने महंगाई के आंकड़ों पर लगातार ध्यान देने की बात कही है, जिससे बाज़ार की उम्मीदें बदल रही हैं। कीमती धातुओं की कीमतों के लिए अगला बड़ा ट्रिगर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, खासकर नॉन-फार्म पेरोल रिपोर्ट और अन्य लेबर मार्केट के आंकड़े, का आना होगा। ये आंकड़े अमेरिकी अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य के बारे में संकेत देंगे और आने वाले महीनों में फेड की ब्याज दरों पर नीति को प्रभावित कर सकते हैं।

भारतीय निवेशकों के लिए अहम बातें

भारत में घरेलू बुलियन की कीमतें मुख्य रूप से दो बातों पर निर्भर करती हैं: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का प्रदर्शन और वैश्विक कीमतों की चाल। अल्पकालिक उतार-चढ़ाव संभव है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि कीमती धातुएं पोर्टफोलियो को विविधता देने का एक अच्छा ज़रिया बनी हुई हैं। आर्थिक अनिश्चितता से बचाव के लिए, छोटी-मोटी कीमत की हलचल के बजाय लंबी अवधि के नज़रिए से निवेश की सलाह दी जाती है। इस सप्ताह कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, डॉलर की मजबूती और अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर कोई भी नई जानकारी, कीमती धातुओं की दिशा तय करेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.