US Dollar के लगातार मज़बूत होने और इंडस्ट्रियल डिमांड में नरमी की आशंकाओं के चलते भारतीय सर्राफा बाज़ार में शुक्रवार को MCX पर सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट देखी गई। इस दौरान, MCX पर Gold Futures 0.51% की नरमी के साथ लगभग ₹1,52,000 प्रति 10 ग्राम (24-कैरेट शुद्धता) पर कारोबार करते दिखे। वहीं, Silver Futures में 0.63% की और बड़ी गिरावट आई और यह ₹2,42,000 प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुँच गए। भारतीय बाज़ार का यह संकेत वैश्विक बाज़ार से भी मिला, जहाँ US Dollar Index 105.50 के ऊपर जाने से डॉलर और मज़बूत हुआ।
बाज़ार पर असर डालने वाले मुख्य कारक
हालांकि, सोने और चांदी की कीमतों को कई चीज़ों का सहारा भी मिल रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी फेडरल रिज़र्व (Federal Reserve) द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें बुलियन (Bullion) को सपोर्ट दे रही हैं। वहीं, चांदी की चाल इंडस्ट्रियल डिमांड पर ज़्यादा निर्भर करती है। इस कारण, चांदी की कीमत कभी-कभी सोने से अलग दिशा में जा सकती है। प्लैटिनम (Platinum) और पैलेडियम (Palladium) जैसी अन्य कीमती धातुओं की कीमतों में भी नरमी देखी गई, जो क्रमशः करीब $950 और $1,000 प्रति औंस (ounce) पर ट्रेड कर रही हैं।
ऐतिहासिक रूप से, जब भी US Dollar मज़बूत होता है, तो MCX पर सोना-चांदी की कीमतों में अक्सर कुछ समय के लिए गिरावट दर्ज की जाती है। ये गिरावटें तब ठीक हो जाती थीं जब भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता था या रेट कट की उम्मीदें मज़बूत होती थीं। फिलहाल, डॉलर की मज़बूती डॉलर-मूल्य वाली कमोडिटीज़ (Commodities) को अन्य मुद्राओं का उपयोग करने वाले खरीदारों के लिए महंगा बना रही है। चांदी के लिए, संभावित औद्योगिक मंदी की चिंताएं इसे और कमज़ोर कर रही हैं, क्योंकि इसकी कीमत मैन्युफैक्चरिंग (Manufacturing) और टेक्नोलॉजी सेक्टर से जुड़ी है, जबकि सोने की मुख्य मांग 'सेफ हेवन' (Safe Haven) एसेट के तौर पर है।
निवेशक US Inflation (मुद्रास्फीति) के अहम आंकड़ों, जैसे कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) पर भी बारीकी से नज़र रखे हुए हैं। यदि Inflation उम्मीद से ज़्यादा ज़िद्दी साबित होती है, तो फेडरल रिज़र्व की दर में कटौती की उम्मीदें कम हो सकती हैं या उसमें देरी हो सकती है, जिससे बुलियन के लिए एक बड़ा सहारा खत्म हो जाएगा। वहीं, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण एक बेसलाइन डिमांड बनी हुई है, लेकिन तनाव में किसी भी तरह की कमी कीमतों को नीचे ला सकती है। कमोडिटी बाज़ारों में उच्च अस्थिरता (Volatility) का मतलब है कि पोजीशन को अनवाइंड (Unwind) करने से भी कीमतों में गिरावट और तेज़ हो सकती है।
आगे की राह
विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में कीमतें भू-राजनीतिक घटनाओं और अमेरिकी मौद्रिक नीति (Monetary Policy) के संकेतों से तय होंगी। सेंट्रल बैंकों की खरीदारी और भू-राजनीतिक जोखिम कीमतों के लिए एक 'फ्लोर' (Floor) बनाए हुए हैं। हालांकि, मज़बूत US Dollar और आने वाले Inflation डेटा को कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी के लिए मुख्य बाधा माना जा रहा है। कुछ जानकारों के अनुसार, सोना तब तक एक रेंज में ट्रेड करता रहेगा जब तक फेडरल रिज़र्व की पॉलिसी स्पष्ट नहीं हो जाती। चांदी का रास्ता भी समग्र इंडस्ट्रियल डिमांड के रुझानों पर निर्भर करेगा, जो आर्थिक डेटा पर आधारित होगा।