इस भारी गिरावट के पीछे कई अहम कारण हैं, जिन्होंने ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट्स में हलचल मचा दी है। Precious Metals में आई शानदार तेजी के बाद इन्वेस्टर्स ने जमकर Profit-taking की, जिससे बिकवाली का दबाव बढ़ गया। साथ ही, अमेरिकी डॉलर (US Dollar) में आई मजबूती ने भी सोने-चांदी पर दबाव डाला।
भू-राजनीतिक तनावों में आई कमी, खासकर ओमान में संभावित US-Iran परमाणु वार्ता की खबरों ने Precious Metals की 'safe-haven' अपील को कम कर दिया।
बाजार में बिकवाली को और हवा मिली जब CME Group ने Gold फ्यूचर्स पर अपनी मार्जिन रिक्वायरमेंट्स को 8% से बढ़ाकर 9% कर दिया, और Silver पर इसे 15% से बढ़ाकर 18% कर दिया। यह बदलाव शुक्रवार से प्रभावी हुआ, जिसके चलते ट्रेडर्स को अपनी पोजीशन लिक्विडेट करनी पड़ी, जिससे गिरावट और तेज हो गई।
पिछले शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा केविन वार्श (Kevin Warsh) को अगला फेडरल रिजर्व चीफ नियुक्त करने की रिपोर्टों ने भी बिकवाली को तेज किया। Kedia Stocks & Commodities के एनालिस्ट्स के मुताबिक, वार्श की नियुक्ति और फेड ऑफिशियल्स की 'hawkish' कमेंट्स ने US ब्याज दरों में और कटौती की उम्मीदों को कम कर दिया है, जो आमतौर पर सोने को सपोर्ट करता है।
हालांकि, मौजूदा वोलेटिलिटी (volatility) के बावजूद, कुछ एनालिस्ट्स भविष्य को लेकर आशावादी हैं। Geojit का अनुमान है कि Gold की कीमतें अस्थिर रहेंगी, लेकिन उनका broader outlook अभी भी bullish है।
Geojit के अनुसार, MCX Gold के लिए ₹1,47,200 और ₹1,42,700 पर अहम सपोर्ट लेवल्स हैं। वहीं, MCX Silver के लिए ₹2,30,177 और ₹2,02,600 के बीच सपोर्ट दिख रहा है।
UBS के एनालिस्ट्स का अनुमान है कि मार्जिन कॉल वोलेटिलिटी के चलते आने वाले दिनों में Gold की कीमतें $4,500 से $4,800 प्रति औंस के बीच consolidate कर सकती हैं। लेकिन, उनका मानना है कि Gold साल के मध्य तक $6,200 प्रति औंस के अपने फोरकास्ट की ओर बढ़ेगा और एक आकर्षक हेज (hedge) बना रहेगा।
इस मंदी का असर Platinum पर भी देखा गया, जो पिछले छह ट्रेडिंग सेशन में 36% तक गिरकर अपने हाई $2,818.06 से $1,808.65 पर आ गया है।