MCX पर सोने के वायदा भाव में सोमवार को **₹1,020** की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह **₹1,49,370** प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। इसकी मुख्य वजह मजबूत होता US डॉलर और बढ़ती ट्रेजरी यील्ड है, जिसके कारण निवेशक सुरक्षित लेकिन अधिक रिटर्न देने वाले बॉन्ड्स की ओर शिफ्ट हो रहे हैं।
डॉलर और बॉन्ड यील्ड का दबाव
सोने की कीमतों पर फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर से भारी दबाव बना हुआ है। US डॉलर इंडेक्स 102.37 के करीब 18 महीने के हाई लेवल के आसपास ट्रेड कर रहा है। डॉलर के मजबूत होने से अन्य करेंसी के खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिससे डिमांड कम होती है। वहीं, अमेरिका की 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.2% पर पहुंच गई है। चूँकि सोने पर कोई ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता, इसलिए बॉन्ड्स से मिलने वाला बेहतर रिटर्न निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है।
फेडरल रिजर्व और भविष्य की चिंताएं
बाजार की नजर अब फेडरल रिजर्व की अगली पॉलिसी मीटिंग पर टिकी है। हालांकि अक्टूबर में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना कम है, लेकिन दिसंबर में रेट हाइक की उम्मीद अभी भी बनी हुई है। ऊंची ब्याज दरें सोने की होल्डिंग कॉस्ट को बढ़ा देती हैं, जिससे इसकी कीमतों में जल्द रिकवरी की उम्मीद कम है।
घरेलू बाजार और सिल्वर की स्थिति
भारत में फिजिकल डिमांड अभी संभली हुई है क्योंकि ऊंची कीमतों के कारण ज्वैलर्स सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। हालांकि, त्योहारी सीजन और शादी-ब्याह के माहौल से बाजार को सहारा मिलने की उम्मीद है। दूसरी ओर, सिल्वर ने सोने से अलग चाल दिखाई है। सिल्वर 0.54% की बढ़त के साथ ₹2.27 लाख प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई है, जो औद्योगिक मांग के कारण सपोर्टेड है।
अगले कुछ हफ्तों में अमेरिका के रोजगार और ट्रेड डेटा से सोने और चांदी की दिशा तय होगी। महंगाई और जियो-पॉलिटिकल टेंशन फिलहाल मार्केट में अस्थिरता का बड़ा कारण बनी हुई हैं।
