13 जुलाई 2026 को MCX पर सोने का अगस्त वायदा **₹1.42 लाख** प्रति 10 ग्राम पर आ गया। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और डॉलर की मजबूती ने सोने पर दबाव बनाया है। निवेशक नॉन-यील्डिंग एसेट्स से हटकर इंटरेस्ट-बेयरिंग विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं, क्योंकि उम्मीद है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रखेगा।
ग्लोबल फैक्टर्स का असर
सोने की कीमतों में गिरावट की मुख्य वजह ग्लोबल एनर्जी मार्केट के हालात और अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जो कि शिपिंग का एक अहम रास्ता है, को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने महंगाई के और बढ़ने की आशंका को बढ़ा दिया है। इस स्थिति को देखते हुए बाजार को उम्मीद है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व महंगाई को काबू में रखने के लिए ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रख सकता है।
जब अमेरिकी ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी यील्ड में भी आमतौर पर बढ़ोतरी होती है। सोना और चांदी, जिनसे कोई ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता, उन्हें इंटरेस्ट-बेयरिंग एसेट्स की तुलना में निवेशकों के लिए कम आकर्षक बना देता है। हालांकि, ऐतिहासिक रूप से सोना भू-राजनीतिक संघर्षों के समय एक सुरक्षित निवेश (Safe Haven) माना जाता रहा है, लेकिन बढ़ती यील्ड और डॉलर की मजबूती के कारण इसका यह आकर्षण फिलहाल कम होता दिख रहा है।
चांदी पर औद्योगिक दबाव
चांदी पर दोतरफा दबाव देखा जा रहा है - कीमती धातु होने के नाते और एक इंडस्ट्रियल कमोडिटी होने के नाते। बाजार जानकारों का कहना है कि औद्योगिक मांग में संभावित मंदी की चिंताएं भी इस अस्थिरता को बढ़ा रही हैं। इनগুলোর बावजूद, कुछ संस्थागत अनुमानों, जैसे कि टाटा म्यूचुअल फंड के अनुसार, लंबी अवधि के कारक जैसे सेंट्रल बैंकों द्वारा लगातार सोने की खरीदारी और रिन्यूएबल एनर्जी व AI हार्डवेयर जैसे सेक्टर्स में चांदी की बढ़ती मांग बनी हुई है। अनुमान यह भी बताते हैं कि 2026 तक वैश्विक चांदी आपूर्ति में कमी बनी रहेगी।
आगे क्या?
अब बाजार की निगाहें अमेरिका के आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर हैं, जिनमें कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) और प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) शामिल हैं। इन रिपोर्ट्स से महंगाई के रुझान पर और अधिक स्पष्टता मिलने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त, निवेशक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श की कांग्रेस के समक्ष गवाही पर भी बारीकी से नजर रखेंगे, जो ब्याज दर नीति की भविष्य की दिशा के संकेत दे सकती है। यदि महंगाई कम होने के संकेत मिलते हैं या मौद्रिक नीति में नरमी आती है, तो कीमतों को स्थिर करने में मदद मिल सकती है, जबकि ऊर्जा लागत में और वृद्धि जारी रहने पर कीमती धातुओं पर दबाव बना रह सकता है।
