MCX पर अक्टूबर डिलीवरी वाले क्रूड ऑयल वायदा में आज **2.87%** की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिससे भाव **₹8,660** प्रति बैरल पर आ गए हैं। इस गिरावट की वजह G7 देशों का अपने रणनीतिक भंडार से **10 करोड़** बैरल तेल और डीजल बाजार में उतारने का फैसला है।
सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर क्रूड ऑयल फ्यूचर्स में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। अक्टूबर कॉन्ट्रैक्ट ₹256 की गिरावट के साथ ₹8,660 प्रति बैरल पर बंद हुआ। बाजार की यह हलचल सीधे तौर पर वैश्विक ऊर्जा नीतियों में आए बदलावों का नतीजा है।
क्यों गिरे दाम?
कीमतों में सुधार की मुख्य वजह G7 देशों का बड़ा कदम है। समूह ने ग्लोबल मार्केट में सप्लाई बढ़ाने के लिए अपने रणनीतिक भंडार से 10 करोड़ बैरल क्रूड ऑयल और डीजल रिलीज करने का निर्णय लिया है। अचानक आई इस सप्लाई से मार्केट में घबराहट है और निवेशकों ने अपनी पोजिशन को एडजस्ट करना शुरू कर दिया है।
इंटरनेशनल मार्केट का हाल
घरेलू बाजार में आई यह सुस्ती अंतरराष्ट्रीय संकेतों के अनुरूप ही है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फिसलकर लगभग $90 प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड $101 प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या है मायने?
भारत दुनिया का एक बड़ा ऊर्जा आयातक है, ऐसे में क्रूड की कीमतों का सीधा असर देश की महंगाई और ट्रेड बैलेंस पर पड़ता है। हालांकि, मौजूदा गिरावट से थोड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन विशेषज्ञ अभी भी सतर्क हैं। खाड़ी देशों में स्थित 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) जैसे ट्रेड रूट्स पर जारी भू-राजनीतिक तनाव अब भी एक बड़ा रिस्क बना हुआ है। यदि सप्लाई चेन में कोई भी बाधा आती है, तो यह मौजूदा राहत कुछ ही पलों में बदल सकती है।
