Lloyds Metals: गढ़चिरौली में माइनिंग का बड़ा दांव, लेकिन ESG जोखिमों ने बढ़ाई टेंशन

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AuthorMehul Desai|Published at:
Lloyds Metals: गढ़चिरौली में माइनिंग का बड़ा दांव, लेकिन ESG जोखिमों ने बढ़ाई टेंशन

महाराष्ट्र सरकार गढ़चिरौली में **₹70,000 करोड़** के माइनिंग प्रोजेक्ट्स पर जोर दे रही है। Lloyds Metals and Minerals यहाँ अपने Surjagarh ऑपरेशंस को तेजी से बढ़ा रही है, लेकिन पर्यावरण और स्थानीय समुदाय की चिंताएं कंपनी के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं।

महाराष्ट्र सरकार ने गढ़चिरौली जिले को आयरन ओर (iron ore) उत्पादन का हब बनाने की तैयारी कर ली है। जनवरी 2025 से अब तक सरकार ने यहां औद्योगिक माइनिंग के लिए ₹70,000 करोड़ से अधिक के निवेश करार किए हैं। राज्य के कुल 260.8 मिलियन टन आयरन ओर भंडार में से 178 मिलियन टन इसी क्षेत्र में मौजूद है, जो इसे औद्योगिक नीति के लिए बेहद अहम बनाता है।

Surjagarh में तेजी से बढ़ता प्रोडक्शन

Lloyds Metals and Minerals Ltd इस पूरे रीजन में प्रमुख खिलाड़ी है, जो Surjagarh माइंस का संचालन करती है। कंपनी ने अपने कामकाज का दायरा काफी आक्रामक तरीके से बढ़ाया है। फाइनेंशियल ईयर 2018-19 में जहां उत्पादन 0.6 मिलियन टन था, वहीं 2022-23 तक यह बढ़कर करीब 10 मिलियन टन के स्तर पर पहुंच गया। यह 16 गुना उछाल कंपनी की आक्रामक रणनीति को दिखाता है, हालांकि संवेदनशील आदिवासी और वन क्षेत्रों में काम करने के कारण कंपनी को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

पर्यावरण और सामाजिक जोखिम

माइनिंग बढ़ने के साथ ही पर्यावरण और सामाजिक मुद्दे भी सुर्खियों में हैं। Hedri, Bande और Mallampad जैसे गांवों के स्थानीय निवासियों ने जल प्रदूषण जैसी गंभीर समस्याएं उठाई हैं। लोगों का कहना है कि माइनिंग के कारण उन्हें पानी के वैकल्पिक और असुरक्षित स्रोतों पर निर्भर होना पड़ रहा है। साथ ही, स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी शिकायतें भी बढ़ रही हैं, जिन्हें माइनिंग गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

निवेश के नजरिए से देखें तो ये जोखिम काफी अहम हैं। आदिवासी इलाकों में काम करने वाली माइनिंग कंपनियों को 'सोशल लाइसेंस' बनाए रखने में भारी संघर्ष करना पड़ता है। अगर स्थानीय विरोध बढ़ता है, तो कामकाज में बाधाएं आ सकती हैं, लॉजिस्टिक्स में देरी हो सकती है या सरकार की सख्ती बढ़ सकती है। यदि कानूनी मामले या रेगुलेटरी जांच तेज होती है, तो कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर बुरा असर पड़ सकता है।

निवेशकों को किन बातों पर रखना चाहिए ध्यान?

सिर्फ प्रोडक्शन के आंकड़ों को देखना ही काफी नहीं है। निवेशकों को कंपनी के एनवायर्नमेंटल कंप्लायंस, पेंडिंग रेगुलेटरी अप्रूवल्स और स्थानीय समुदाय के साथ संबंधों पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) या अदालतों के किसी भी हस्तक्षेप से प्रोजेक्ट की टाइमलाइन और लागत बदल सकती है, जो सीधे शेयर के परफॉर्मेंस पर असर डालेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.