बैटरी-ग्रेड लिथियम कार्बोनेट की कीमतें अगस्त में औसतन **¥140,000** प्रति टन रहीं, जो पिछले महीने की तुलना में **10.3%** की गिरावट है। बाजार का ध्यान अब तत्काल इन्वेंट्री स्तरों से हटकर **2027** तक संभावित वैश्विक सप्लाई सरप्लस पर चला गया है, जिससे एनर्जी स्टोरेज सेल की कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है।
कीमतों में गिरावट और सप्लाई सरप्लस का डर
वैश्विक लिथियम बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अगस्त में बैटरी-ग्रेड लिथियम कार्बोनेट की औसत कीमत ¥140,000 प्रति टन दर्ज की गई, जो पिछले महीने से 10.3% कम है। यह गिरावट इस महत्वपूर्ण बैटरी कच्चे माल की कीमतों में नरमी का संकेत दे रही है। पहले जहां बाजार इन्वेंट्री की कमी पर केंद्रित था, वहीं अब यह उम्मीदें बढ़ रही हैं कि सप्लाई में सुधार होगा।
2027 के लिए सप्लाई सरप्लस की चिंता
इंडस्ट्री की भविष्यवाणियों के अनुसार, 2027 तक लिथियम बाजार में सरप्लस (अतिरिक्त सप्लाई) की स्थिति बन सकती है। दुनिया भर में नई माइनिंग क्षमताएं बढ़ने के साथ, विश्लेषकों का मानना है कि सप्लाई मांग से ज्यादा हो सकती है। हालांकि, इंडस्ट्री "गोल्डन सितंबर और सिल्वर अक्टूबर" यानी त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने पर भी नजर रख रही है। इस अवधि में ¥145,000 से ¥150,000 प्रति टन तक कीमतों में अस्थायी उछाल आ सकता है। लेकिन 2027 तक सप्लाई की रफ्तार पर ही कीमतों का रुख निर्भर करेगा।
एनर्जी स्टोरेज सेल की कीमतों पर असर
कच्चे माल की लागत में कमी का असर एनर्जी स्टोरेज सेल की कीमतों पर भी दिख रहा है। जुलाई में, हाई-कैपेसिटी 280Ah और 314 Ah लिथियम आयरन फॉस्फेट (LFP) एनर्जी स्टोरेज सेल की औसत कीमत 4% गिर गई। यह गिरावट नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है, जो बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) का उपयोग सौर और पवन ऊर्जा की अनियमितता को प्रबंधित करने के लिए करती हैं। भारतीय निर्माताओं और एनर्जी स्टोरेज सप्लाई चेन से जुड़ी कंपनियों के लिए, इससे बैटरी सिस्टम की इनपुट लागत कम हो सकती है।
नीतिगत बदलावों से लागत पर अनिश्चितता
कच्चे माल की कीमतें कम हो रही हैं, लेकिन वैश्विक बैटरी व्यापार की लागत संरचना नियामक बदलावों के कारण जटिल हो रही है। चीन सितंबर 2026 से एक नया बैटरी खपत कर (Consumption Tax) लागू करने वाला है, जिससे शुरुआत में लागत 2% और 2027 तक 4% बढ़ सकती है। इसके अलावा, अमेरिका द्वारा चीन-उत्पन्न एनर्जी स्टोरेज सिस्टम पर 40.9% तक के टैरिफ जैसे बढ़ते व्यापार अवरोध, वैश्विक सप्लाई चेन में अनिश्चितता पैदा कर रहे हैं। ये नीतियां अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए लिथियम की कम कीमतों के लाभ को कम कर सकती हैं।
निवेशकों के लिए मुख्य बात यह होगी कि सितंबर और अक्टूबर के त्योहारी सीजन के दौरान कीमतों में उछाल कितना टिकाऊ रहता है। यदि इस अवधि में मांग उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहती है, या 2027 का अनुमानित सप्लाई सरप्लस तेजी से आता है, तो कमोडिटी की कीमतों पर और दबाव आ सकता है।
