Kotak Institutional Equities ने वेस्ट एशिया में जारी तनाव को देखते हुए FY27 के लिए कच्चे तेल (Crude Oil) का अनुमान बढ़ाकर **$100** प्रति बैरल कर दिया है। यह भारत के लिए चिंताजनक हो सकता है, क्योंकि देश अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है।
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने अपनी रिपोर्ट में कच्चे तेल की कीमतों को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। FY27 के लिए अनुमान को $90 से बढ़ाकर $100 प्रति बैरल कर दिया गया है। ब्रोकरेज का मानना है कि वेस्ट एशिया में अनिश्चितता के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। हालांकि, FY28 के लिए उम्मीद अभी भी $75 प्रति बैरल की बनी हुई है, लेकिन फिलहाल बाजार में भारी अस्थिरता है।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी तेल खपत का 85% से अधिक हिस्सा आयात करता है। ऐसे में क्रूड की बढ़ती कीमतें न केवल इंपोर्ट बिल को बढ़ाती हैं, बल्कि रुपये की कमजोरी और देश में महंगाई का खतरा भी पैदा करती हैं।
किन सेक्टरों में दिखेगा दबाव?
कच्चे तेल की कीमतों का सीधा असर कई सेक्टरों के मार्जिन पर पड़ता है:
- Aviation: जेट फ्यूल की लागत बढ़ने से एयरलाइंस कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ेगा।
- Oil Marketing Companies: Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum जैसी कंपनियां अगर कीमतों को ग्राहकों पर नहीं डाल पाईं, तो उनके मार्जिन प्रभावित होंगे।
- अन्य सेक्टर: पेंट, टायर और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी कंपनियां भी कच्चे तेल के महंगे होने से प्रभावित हो सकती हैं, क्योंकि उनके इनपुट कॉस्ट में बड़ा इजाफा हो सकता है।
आने वाले दिनों में निवेशक कंपनियों के मैनेजमेंट की कमेंट्री पर नजर रखेंगे कि वे मार्जिन बचाने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं।
