कोच्चि टी ऑक्शन में नए TradeForge प्लेटफॉर्म की तकनीकी विफलता के कारण चाय की बिक्री बुरी तरह प्रभावित हुई है। डिलीवरी ऑर्डर अटकने से छोटे व्यापारियों की नकदी (Cash flow) फंस गई है, जिसका सीधा असर सेल नंबर 44 के आंकड़ों पर पड़ा है।
कोच्चि टी ऑक्शन मार्केट फिलहाल एक बड़ी डिजिटल चुनौती से जूझ रहा है। नए TradeForge प्लेटफॉर्म के रोलआउट के बाद से ही सिस्टम में आई खामियों ने व्यापारियों और निर्यातकों की पूरी सप्लाई चेन को रोक कर रख दिया है। सेल नंबर 44 के दौरान पार्टिसिपेंट्स को डिलीवरी ऑर्डर जेनरेट करने में भारी मशक्कत करनी पड़ी, जिससे माल की आवाजाही पूरी तरह रुक गई है।
छोटे व्यापारियों पर सीधा प्रहार
यह स्थिति छोटे खरीदारों के लिए मुसीबत बन गई है। छोटे कारोबारी अक्सर 'क्विक सेल' मॉडल पर काम करते हैं, ताकि उनका पैसा रोटेशन में रहे। चूंकि TradeForge सिस्टम पेमेंट होने के बाद भी सामान रिलीज की अनुमति नहीं दे पा रहा है, इसलिए व्यापारियों का पैसा स्टॉक में फंस गया है। इससे उनके लिए आगे के ऑर्डर्स को पूरा करना मुश्किल हो रहा है।
सेल आंकड़ों पर असर
सिस्टम फेलियर के कारण मार्केट सेंटिमेंट काफी कमजोर हुआ है। सेल नंबर 44 के आंकड़ों पर नजर डालें, तो 4,38,007 किलो डस्ट की पेशकश के मुकाबले केवल 52 प्रतिशत की ही बिक्री हो पाई। हालांकि, लीफ चाय की स्थिति थोड़ी बेहतर रही, जहां 3,30,766 किलो की पेशकश में 87 प्रतिशत का क्लियरेंस रेट दर्ज किया गया।
आगे की राह
टी बायर्स एसोसिएशन ने इस गंभीर मामले पर Tea Board of India से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि सिस्टम कितनी जल्दी सामान्य होता है। यदि यह तकनीकी अस्थिरता जारी रही, तो बाजार में खरीदारों का भरोसा कम हो सकता है और चाय की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है।
