पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कोच्चि से ऑर्थोडॉक्स (Orthodox) चाय का निर्यात रुक गया है। माल ढुलाई की बढ़ती लागत और पोर्ट पर देरी ने पश्चिम एशियाई और GCC बाजारों में शिपमेंट को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस कारण हालिया नीलामी में **19%** ऑर्थोडॉक्स चाय नहीं बिक पाई और औसत दाम गिरकर **₹183** प्रति किलोग्राम हो गया।
पश्चिम एशिया संकट से कोच्चि की चाय इंडस्ट्री को झटका
कोच्चि में चाय का कारोबार मंदी की मार झेल रहा है क्योंकि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने पारंपरिक निर्यात मार्गों को बाधित कर दिया है। कोच्चि ऑक्शन से निर्यात करने वाले व्यापारियों ने खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) और अन्य पश्चिम एशियाई देशों में नई शिपमेंट लगभग रोक दी है। इसका मुख्य कारण माल ढुलाई के बढ़ते किराए, लंबे ट्रांजिट समय और प्रमुख बंदरगाहों पर अनिश्चितता है, जिससे निर्यातकों के लिए मुनाफे का मार्जिन बनाए रखना मुश्किल हो गया है।
निर्यात फोकस बदला, यूरोप और रूस की ओर;
लॉजिस्टिक्स की दिक्कतों के चलते निर्यात का फोकस लगभग पूरी तरह से यूरोप और रूस जैसे बाजारों की ओर शिफ्ट हो गया है। नतीजतन, पश्चिम एशियाई खरीदारों के लिए भेजी जाने वाली चाय का एक बड़ा हिस्सा फंस गया है। नीलामी संख्या 29 पर इसका असर साफ दिखा, जहां पेश की गई 2,69,479 किलोग्राम ऑर्थोडॉक्स चाय में से 19% यानी 51,192 किलोग्राम से ज़्यादा चाय नहीं बिक पाई। इस चाय का औसत दाम पिछले हफ्ते ₹186 प्रति किलोग्राम से घटकर ₹183 प्रति किलोग्राम पर आ गया।
क्वालिटी पर टिका बाजार, महंगा चाय को मिला सहारा
निर्यात की इन चुनौतियों के बावजूद, चाय के बाजार में क्वालिटी के आधार पर एक बड़ा अंतर देखा जा रहा है। जहां औसत और निम्न-गुणवत्ता वाली चाय को खरीदारों से मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं उच्च-गुणवत्ता वाली 'होल लीफ' चाय ने अपनी पकड़ बनाए रखी है। नीलामी में इनके कुछ ग्रेड के दाम ₹10 से ₹15 प्रति किलोग्राम तक बढ़े हैं। द टी ट्रेड एसोसिएशन ऑफ कोचीन ने बताया कि खरीदार सतर्कता बरत रहे हैं और केवल बेहतरीन क्वालिटी की चाय ही खरीद रहे हैं, जबकि सामान्य किस्मों से बच रहे हैं।
CTC चाय की मजबूत पकड़
ऑर्थोडॉक्स लीफ सेगमेंट की मुश्किलों के विपरीत, सीटीसी (CTC - Crush, Tear, Curl) चाय का बाजार स्थिर प्रदर्शन कर रहा है। सीटीसी लीफ सेगमेंट में 29,593 किलोग्राम चाय की पेशकश की गई, जिसमें से 96% की बिक्री हुई और दाम मजबूत रहे। इसी तरह, सीटीसी डस्ट सेगमेंट में भी अच्छी मांग देखी गई, खासकर अच्छी 'लिकरिंग' वाली चाय के लिए। पेश की गई 7,29,953 किलोग्राम चाय में से 86% बिक गई। ऑर्थोडॉक्स डस्ट मार्केट ने भी अच्छा प्रदर्शन किया, जिसमें सीमित 9,298 किलोग्राम की 100% बिक्री दर्ज की गई, क्योंकि निर्यातकों की इस विशेष श्रेणी में लगातार दिलचस्पी बनी हुई है।
आगे क्या?
चाय उद्योग के निवेशक और हितधारक इन लॉजिस्टिक बाधाओं की अवधि और माल ढुलाई दरों में किसी भी संभावित बदलाव पर बारीकी से नजर रखेंगे। चाय उत्पादकों की घरेलू मांग या वैकल्पिक निर्यात बाजारों की ओर मुड़ने की क्षमता आने वाले हफ्तों में निम्न और मध्यम दर्जे की चाय की कीमतों को स्थिर करने में महत्वपूर्ण होगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या ऑर्थोडॉक्स लीफ चाय में वर्तमान मूल्य गिरावट एक अस्थायी बाजार समायोजन है या प्रमुख निर्यात गंतव्यों के नुकसान का परिणाम है।
