UPI Charges: केरल के ज्वैलर्स की बड़ी बगावत, 15 अक्टूबर को सड़कों पर उतरेंगे कारोबारी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
UPI Charges: केरल के ज्वैलर्स की बड़ी बगावत, 15 अक्टूबर को सड़कों पर उतरेंगे कारोबारी

केरल के गोल्ड और सिल्वर मर्चेंट्स एसोसिएशन ने 15 अक्टूबर को प्रदर्शन का ऐलान किया है। ज्वैलर्स UPI पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट्स (MDR) का विरोध कर रहे हैं, उनका कहना है कि ट्रांजैक्शन फीस उनके मुनाफे पर सीधी चोट है।

केरल के रिटेल ज्वैलर्स 15 अक्टूबर को UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट्स (MDR) लागू करने के विरोध में बड़े प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। केरल गोल्ड एंड सिल्वर मर्चेंट्स एसोसिएशन का मानना है कि ज्वेलरी शॉप्स के लिए इन ट्रांजैक्शन फीस को झेलना नामुमकिन है। दरअसल, ज्वेलरी कारोबार में वर्किंग कैपिटल की जरूरत बहुत ज्यादा होती है और मुनाफा मार्जिन काफी कम रहता है, ऐसे में अतिरिक्त खर्च बिजनेस की कमर तोड़ सकते हैं।

मुनाफे पर कैसे पड़ेगा असर?

इस उद्योग की मुख्य चिंता बिजनेस मॉडल को लेकर है। सोना एक महंगी कमोडिटी है, लेकिन रिटेलर का मुनाफा काफी कम होता है। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई दुकान ₹1,00,000 का सोना बेचती है, तो उस पर 1% का ट्रांजैक्शन चार्ज भी ₹1,000 बैठता है। कम मार्जिन वाले इस बिजनेस में यह सीधा नेट प्रॉफिट से कटौत्री है। व्यापारियों का तर्क है कि फीस की कैलकुलेशन में कीमती धातुओं के बिजनेस की बारीकियों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?

ज्वेलरी सेक्टर में निवेश करने वालों के लिए यह एक बड़ा ऑपरेशनल रिस्क हो सकता है। यदि रिटेलर्स पर ट्रांजैक्शन लागत बढ़ती है, तो कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ना तय है। Titan Company और Kalyan Jewellers जैसे बड़े प्लेयर्स शायद इन खर्चों को मैनेज कर लें, लेकिन पूरा सेक्टर इस पॉलिसी बदलाव के प्रति काफी संवेदनशील है। सरकार का अब तक UPI पर जीरो-फी पॉलिसी का रुख रहा है। अगर यह बदलता है, तो देशभर के रिटेलर्स को अपना कॉस्ट स्ट्रक्चर बदलना होगा, जिसका सीधा असर कंपनियों के बॉटम लाइन पर पड़ सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.