केरल सरकार ने प्राकृतिक रबर की सपोर्ट प्राइस (Support Price) में बड़ा इजाफा किया है। अब किसानों को ₹250 प्रति किलो रबर मिलेगा, जो पहले ₹200 था। इस फैसले से खेती की लागत से जूझ रहे किसानों को राहत मिलेगी।
रबर किसानों के लिए बड़ी खबर
केरल सरकार ने प्राकृतिक रबर का न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price) ₹200 प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर ₹250 प्रति किलोग्राम कर दिया है। यह बढ़ी हुई कीमत 3 जुलाई, 2026 से लागू हो गई है और राज्य की रबर प्रोडक्शन इंसेंटिव स्कीम (Rubber Production Incentive Scheme) के तहत दी जाएगी। इस कदम का मुख्य मकसद बढ़ती खेती लागत के बीच रबर किसानों की आय को सुरक्षित रखना है।
खेती की लागत का गणित
यह फैसला रबर उत्पादक संगठनों और किसानों के लगातार प्रतिनिधित्व के बाद आया है। हाल के दिनों में मज़दूरी, खाद और अन्य ज़रूरी चीज़ों के दाम बढ़ने से किसानों के मार्जिन पर दबाव था। यह नई सपोर्ट प्राइस किसानों के लिए एक सेफ्टी नेट (Safety Net) का काम करेगी, खासकर तब जब बाज़ार में रबर की कीमतें उत्पादन लागत से नीचे चली जाती हैं।
निवेशकों के लिए ज़रूरी बातें
निवेशकों, खासकर टायर और रबर बनाने वाली कंपनियों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है। केरल भारत में प्राकृतिक रबर का एक बड़ा उत्पादक है। जब राज्य सरकार सपोर्ट प्राइस बढ़ाती है, तो इसका असर स्थानीय बाज़ार की कीमतों पर पड़ता है। टायर कंपनियों के लिए यह कच्चे माल की खरीद लागत को प्रभावित कर सकता है। अगर घरेलू कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो कंपनियों पर मार्जिन का दबाव बढ़ सकता है, खासकर अगर वे इन बढ़ी हुई लागतों को ग्राहकों पर नहीं डाल पाते।
आगे क्या?
अब यह देखना होगा कि बाज़ार में रबर की कीमतें इस नई सपोर्ट प्राइस के मुकाबले कैसी रहती हैं। अगर वैश्विक कीमतें सपोर्ट प्राइस से कम रहती हैं, तो सरकार पर इंसेंटिव स्कीम का वित्तीय बोझ बढ़ सकता है। वहीं, अगर रबर की डिमांड बढ़ती है और कीमतें सपोर्ट प्राइस से ऊपर चली जाती हैं, तो सरकारी दखल की ज़रूरत कम हो जाएगी। कंपनियों के लिए इनपुट कॉस्ट (Input Cost) को मैनेज करना और सही प्राइसिंग स्ट्रेटेजी (Pricing Strategy) बनाना आगे चलकर ज़रूरी होगा।
