केरल के गोल्ड मर्चेंट्स ने राज्य में ज्वेलरी पार्क बनाने के लिए **50%** से ज्यादा फंडिंग देने का प्रस्ताव रखा है। साथ ही, तस्करी रोकने के लिए सरकार से इंपोर्ट ड्यूटी को **15%** से घटाकर **6%** करने की मांग की गई है।
केरल गोल्ड एंड सिल्वर मर्चेंट्स एसोसिएशन (KGSMA) अब गोल्ड ट्रेड को नया रूप देने की तैयारी में है। एसोसिएशन का लक्ष्य राज्य में ही एक बड़ा ज्वेलरी मैन्युफैक्चरिंग पार्क विकसित करना है, ताकि केरल की मुंबई और गुजरात जैसे बड़े हब पर निर्भरता कम हो सके। इस कदम से राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा।
टैक्स पॉलिसी में बदलाव की मांग
एसोसिएशन का तर्क है कि 13 मई, 2026 से गोल्ड और सिल्वर पर लगी 15% की भारी इंपोर्ट ड्यूटी तस्करी को बढ़ावा दे रही है। वैध तरीके से काम करने वाले व्यापारियों के लिए तस्करी वाले सस्ते सोने से मुकाबला करना मुश्किल हो गया है। व्यापारियों की मांग है कि ड्यूटी को घटाकर 6% कर दिया जाए, जिससे ट्रेड फॉर्मलाइज हो सके और ग्रे मार्केट पर लगाम लगे।
ग्राहकों का बदला रुख और चुनौतियां
फिलहाल, गोल्ड सेक्टर मार्जिन के दबाव से जूझ रहा है। सोने की ऊंची कीमतों के चलते ग्राहकों का रुझान बदल गया है और रिटेल सेल्स का करीब 70% हिस्सा अब पुराने सोने के एक्सचेंज (Old-Gold Exchange) से आ रहा है।
सरकार ने कोच्चि-त्रिशूर बेल्ट में 'गोल्ड कॉरिडोर' के लिए ₹10 करोड़ का शुरुआती बजट आवंटित किया है, लेकिन इस प्रोजेक्ट के सामने पर्यावरण संबंधी चुनौतियां भी हैं। ज्वेलरी निर्माण में साइनाइड जैसे खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल होता है, जिसके लिए सख्त पर्यावरण मंजूरी और वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम की जरूरत है। अब निवेशकों की नजरें सरकार के साथ होने वाली आगामी बैठकों पर टिकी हैं कि क्या टैक्स में राहत मिलेगी और इस पार्क के लिए जरूरी मंजूरी मिल पाएगी।
