केरल गोल्ड एंड सिल्वर मर्चेंट्स एसोसिएशन ने नकली सोने पर पाए गए नकली HUID स्टैम्प की जांच के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) से अनुरोध किया है। इन नकली मोहरों पर असली रजिस्ट्रेशन नंबर का इस्तेमाल किया गया था, जिससे ग्राहकों और सोने पर लोन देने वाली वित्तीय संस्थाओं की चिंता बढ़ गई है। यह घटना राष्ट्रीय हॉलमार्किंग सिस्टम और सोने को गिरवी रखकर लोन देने की प्रथा की विश्वसनीयता पर खतरा पैदा करती है।
सोने की धोखाधड़ी का बड़ा मामला
केरल गोल्ड एंड सिल्वर मर्चेंट्स एसोसिएशन ने भारतीय मानक ब्यूरो (Bureau of Indian Standards - BIS) से नकली सोने के गहनों पर पाए गए जाली HUID (Hallmark Unique Identification) स्टैम्प की विस्तृत जांच शुरू करने का औपचारिक अनुरोध किया है। यह मामला तब सामने आया जब कोझिकोड के थामरस्सेरी में सोने की चूड़ियां नकली पाई गईं, जिन्हें पहले एक वित्तीय संस्थान ने गिरवी रखकर लोन दिया था। वेरिफिकेशन प्रक्रिया के दौरान इन गहनों के जाली होने का पता चला, जिससे ज्वेलरी व्यापार और गोल्ड-लोन सेक्टर के लिए एक बड़ा सुरक्षा जोखिम सामने आया है।
HUID के साथ छेड़छाड़ का बड़ा असर
इस घटना ने इंडस्ट्री के लिए चिंता बढ़ा दी है क्योंकि नकली गहनों पर लगे HUID नंबर असली, रजिस्टर्ड गहनों से मेल खा रहे थे। यह अनोखे पहचान नंबरों को कॉपी करने या उनका दुरुपयोग करने की क्षमता एक सोची-समझी साजिश की ओर इशारा करती है, न कि किसी साधारण गलती की। ज्वेलरी सेक्टर के लिए, HUID सिस्टम सोने के लेनदेन में पारदर्शिता और विश्वास लाने के लिए शुरू किया गया था। अगर यूनिक पहचान नंबरों का आसानी से दुरुपयोग किया जा सकता है, तो यह खरीदारों के बीच अनिश्चितता पैदा कर सकता है और हॉलमार्किंग प्रोग्राम की प्रभावशीलता को कम कर सकता है, जिसका उद्देश्य सोने की शुद्धता और उत्पत्ति सुनिश्चित करना है।
वित्तीय संस्थानों पर असर
भारत में, खासकर दक्षिणी क्षेत्रों में, कई बैंक और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (NBFCs) सोने को गिरवी रखकर लोन देने का बड़ा कारोबार करती हैं। जब नकली हॉलमार्क वाला सोना बाजार में आता है, तो यह सीधे तौर पर इन वित्तीय संस्थानों के लिए जोखिम पैदा करता है। यदि लोन देने वाले संस्थान नकली सोने को असली समझकर गिरवी रखते हैं, तो उन्हें भारी वित्तीय नुकसान हो सकता है। इससे उन्हें गोल्ड-लोन के लिए और भी कड़ी, महंगी वेरिफिकेशन प्रक्रियाएं अपनानी पड़ सकती हैं। नतीजतन, ग्राहकों को गोल्ड लोन लेने में देरी या अधिक प्रोसेसिंग फीस का सामना करना पड़ सकता है।
इंडस्ट्री के अगले कदम
सोने के बाजार में निवेशकों और अन्य लोगों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि BIS इस व्यापक जांच के अनुरोध पर कैसी प्रतिक्रिया देता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि क्या नियामक HUID सिस्टम के लिए अतिरिक्त सुरक्षा सुविधाएँ लागू करता है या खुदरा विक्रेताओं और लोन देने वाली संस्थाओं के लिए कड़े वेरिफिकेशन मानकों को अनिवार्य करता है। हॉलमार्क वाले सोने में ग्राहकों का विश्वास बनाए रखने के लिए एक त्वरित और पारदर्शी समाधान महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, बाजार के जानकार यह भी देख सकते हैं कि क्या अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह के धोखाधड़ी के मामले सामने आते हैं, क्योंकि इससे संगठित ज्वेलरी खुदरा विक्रेताओं की प्रतिष्ठा पर असर पड़ सकता है, जो हॉलमार्किंग सिस्टम की अखंडता पर निर्भर करते हैं।
