Kashmir Apple Market: सेब की कीमतों में भारी गिरावट, जल्दबाजी में हुई हार्वेस्टिंग से किसानों को बड़ा नुकसान

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Kashmir Apple Market: सेब की कीमतों में भारी गिरावट, जल्दबाजी में हुई हार्वेस्टिंग से किसानों को बड़ा नुकसान

कश्मीर की मंडियों में सेब के दाम गिरकर **₹700** से **₹1,000** प्रति कार्टन पर आ गए हैं, जो पहले **₹1,700** तक पहुंच गए थे। समय से पहले फसल तोड़ने के कारण बाजार में सप्लाई बढ़ गई है, जिससे क्वालिटी और स्टोरेज पर भी खतरा मंडरा रहा है।

बाजार में सप्लाई का दबाव

कश्मीर वैली की थोक मंडियों में इस समय सेब की भारी आवक देखी जा रही है। 15-16 किलो वाले सेब के कार्टन जो कुछ हफ़्तों पहले ₹1,100 से ₹1,700 में बिक रहे थे, अब उनकी कीमत गिरकर ₹700 से ₹1,000 के दायरे में सिमट गई है। इस गिरावट के पीछे की मुख्य वजह किसानों की जल्दबाजी है, जिन्होंने 'कुल्लू डिलीशियस' और 'स्टैंडर्ड डिलीशियस' जैसी किस्मों को उनकी पूरी मैच्योरिटी से पहले ही तोड़ लिया।

डिमांड और क्वालिटी की समस्या

फिलहाल मंडियों में हर दिन लगभग 18 लाख सेब के कार्टन पहुंच रहे हैं। डिमांड की तुलना में सप्लाई इतनी ज्यादा है कि खरीदार कम क्वालिटी वाले माल को लेने से कतरा रहे हैं। जल्दी तोड़ने के कारण सेब में मिठास कम है और उनकी लाइफ भी कम होती जा रही है, जिससे व्यापारियों द्वारा माल रिजेक्ट करने के मामले बढ़ गए हैं।

स्टोरेज का संकट

यह स्थिति उन उत्पादकों के लिए सबसे ज्यादा जोखिम भरी है जो कोल्ड स्टोरेज (CA Storage) पर निर्भर रहते हैं। समय से पहले टूटे सेब जल्दी खराब हो जाते हैं और उनमें 'सुपरफिशियल स्केल्ड' जैसी दिक्कतें आ जाती हैं, जिससे उनकी मार्केट वैल्यू पूरी तरह खत्म हो जाती है।

आंकड़ों पर नजर डालें तो कश्मीर में मौजूदा CA स्टोरेज क्षमता लगभग 2.92 लाख मीट्रिक टन है, जबकि जरूरत 6 लाख मीट्रिक टन की है। पर्याप्त स्टोरेज न होने के कारण किसानों को मजबूरी में अपना माल तुरंत कम दामों पर बेचना पड़ रहा है। बागवानी उद्योग को बचाने के लिए अब स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाना और हार्वेस्टिंग के सख्त मानकों को अपनाना अनिवार्य हो गया है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.