Wheat Crisis: कर्नाटक में फ्लोर मिल्स की मांग, FCI से गेहूं का कोटा बढ़ाने की अपील

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Wheat Crisis: कर्नाटक में फ्लोर मिल्स की मांग, FCI से गेहूं का कोटा बढ़ाने की अपील

कर्नाटक की रोलर फ्लोर मिल्स ने गेहूं की किल्लत दूर करने के लिए फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) से साप्ताहिक आवंटन को बढ़ाकर **3 लाख टन** करने की मांग की है। फिलहाल मिल्स को जरूरत का महज **17%** ही सप्लाई मिल पा रही है, जिससे रॉ-मटेरियल की लागत बढ़ रही है।

सप्लाई चेन का संकट

कर्नाटक रोलर फ्लोर मिल्स एसोसिएशन ने FCI से ओपन मार्केट सेल स्कीम के तहत गेहूं का आवंटन बढ़ाने का आग्रह किया है। राज्य भर की 40 से ज्यादा प्रोसेसिंग यूनिट्स के सामने दिवाली के पीक सीजन में काम जारी रखना बड़ी चुनौती बन गया है।

ऑक्शन के आंकड़े और बढ़ती महंगाई

21 अक्टूबर को हुई हालिया ई-नीलामी में कर्नाटक की मिल्स को 34,600 टन की जरूरत के मुकाबले सिर्फ 6,000 टन गेहूं मिला। इस आपूर्ति संकट के कारण 14 अक्टूबर से 21 अक्टूबर के बीच मध्यप्रदेश, राजस्थान और हरियाणा की गेहूं वैरायटी की कीमतों में 8% का उछाल आया है। फिलहाल बेंगलुरु मार्केट में एमपी गेहूं ₹3,400 प्रति क्विंटल और राजस्थान का गेहूं ₹3,600 प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुंच गया है।

मार्जिन पर दबाव का खतरा

फूड प्रोसेसिंग सेक्टर के लिए गेहूं सबसे प्रमुख कच्चा माल है। इनपुट कॉस्ट बढ़ने से कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर सीधा असर पड़ रहा है। अगर कंपनियां इस बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों तक नहीं पहुंचा पाती हैं, तो त्योहारों के दौरान उनके नेट प्रॉफिट में गिरावट तय है।

वैरायटी का पेच

एसोसिएशन ने केवल वॉल्यूम नहीं, बल्कि गेहूं की किस्म में बदलाव की भी मांग की है। मिलर्स का कहना है कि वर्तमान सप्लाई में 'ड्यूरम' गेहूं ज्यादा है, जिसका पीलापन कई फूड प्रोडक्ट्स के लिए अनुपयुक्त है। वे पंजाब से 'नॉन-ड्यूरम' गेहूं की सप्लाई बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं ताकि नवंबर की शुरुआत से पहले बाजार में कीमतों को स्थिर किया जा सके।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.