JioFinance का नया दांव: अब 'JioSilver' के साथ डिजिटल चांदी में निवेश करना हुआ बेहद आसान

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
JioFinance का नया दांव: अब 'JioSilver' के साथ डिजिटल चांदी में निवेश करना हुआ बेहद आसान

Jio Finance Platform and Service Limited ने अपना नया डिजिटल प्लेटफॉर्म 'JioSilver' लॉन्च कर दिया है। अब यूजर्स महज **₹10** से **99.9%** शुद्ध चांदी में निवेश कर सकेंगे, जिससे कंपनी के कमोडिटी पोर्टफोलियो का दायरा और बढ़ गया है।

Jio Financial Services Limited की सब्सिडियरी, Jio Finance Platform and Service Limited (JFPSL) ने अपने डिजिटल इन्वेस्टमेंट सफर में एक और कदम आगे बढ़ाते हुए 'JioSilver' पेश किया है। JioFinance ऐप में इंटीग्रेटेड यह नई सर्विस ग्राहकों को 99.9% शुद्ध चांदी खरीदने और बेचने की सुविधा देती है। इसमें निवेश की शुरुआत सिर्फ ₹10 से होती है और एक ट्रांजैक्शन की अधिकतम सीमा ₹1 लाख तय की गई है।

इकोसिस्टम को मजबूती

डिजिटल गोल्ड के बाद अब सिल्वर के जुड़ने से JioFinance खुद को एक 'वन-स्टॉप' रिटेल फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है। ऐप के जरिए यूजर्स न केवल चांदी की लाइव मार्केट कीमतें ट्रैक कर सकते हैं, बल्कि साप्ताहिक या मासिक आधार पर सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) भी शुरू कर सकते हैं। ग्राहकों की सुविधा के लिए इसमें डिजिटल होल्डिंग्स को फिजिकल चांदी के सिक्कों में बदलकर घर तक मंगाने का विकल्प भी दिया गया है। कंपनी ने भरोसा दिलाया है कि इसमें मौजूद चांदी NABL एक्रेडिटेड लैब्स द्वारा प्रमाणित है।

स्ट्रैटेजिक महत्व

एक कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के तौर पर Jio Financial Services का लक्ष्य डिजिटल लेंडिंग, इंश्योरेंस ब्रोकिंग और एसेट मैनेजमेंट जैसे कई वर्टिकल्स में अपनी पैठ मजबूत करना है। डिजिटल गोल्ड और सिल्वर जैसे प्रोडक्ट्स के जरिए कंपनी का मुख्य फोकस अपने यूजर बेस को बढ़ाना और उन्हें अन्य फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स की तरफ आकर्षित करना है। हालांकि, डिजिटल कमोडिटी मार्केट में पहले से ही कई फिनटेक ऐप्स सक्रिय हैं, ऐसे में यूजर्स का भरोसा जीतने के लिए यूजर एक्सपीरियंस और बेहतर प्राइसिंग ही सबसे बड़ी चुनौती होगी।

निवेशकों के लिए अहम संकेत

निवेशकों को यह देखना चाहिए कि कंपनी अपने इन नए फीचर्स को कितनी तेजी से स्केल कर पाती है। हालांकि ये डिजिटल प्रोडक्ट्स यूजर एंगेजमेंट के लिए शानदार हैं, लेकिन इनका कंपनी के कुल रेवेन्यू में योगदान फिलहाल लेंडिंग और एसेट मैनेजमेंट के मुकाबले छोटा ही है। निवेशकों को कंपनी के एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) की ग्रोथ और डिजिटल सेवाओं के लिए उभरते रेगुलेटरी नियमों पर नजर रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.