प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से विदेशी मुद्रा बचाने और आत्मनिर्भर बनने के लिए सोने की गैर-जरूरी खरीदारी कम करने की अपील की है। इस बयान के बाद Jewellery स्टॉक्स में बिकवाली का दबाव देखा गया, क्योंकि निवेशकों को डिमांड घटने का डर सता रहा है। वित्त वर्ष 2026 में गोल्ड इंपोर्ट का खर्च रिकॉर्ड **$71.98 बिलियन** तक पहुंच गया है, जिसे देखते हुए सख्त नियमों की आशंका भी बनी हुई है।
मंगलवार, 1 सितंबर 2026 को ज्वेलरी स्टॉक्स पर दबाव साफ दिखा। प्रधानमंत्री की 'स्वदेशी' अपनाने और सोने की खपत पर लगाम लगाने की अपील से निवेशकों में घबराहट है। सरकार का मुख्य मकसद देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाना और ट्रेड डेफिसिट को नियंत्रित करना है।
सरकारी आंकड़ों का दबाव
वित्त वर्ष 2025-26 में गोल्ड इंपोर्ट की मात्रा गिरकर 721.03 टन रही, लेकिन ग्लोबल कीमतों में उछाल के चलते इसका बिल बढ़कर रिकॉर्ड $71.98 बिलियन हो गया। डॉलर की बढ़ती मांग और रुपये पर पड़ते दबाव के कारण सरकार अब नैतिक दबाव (moral suasion) की रणनीति अपना रही है।
शेयर बाजार का रिएक्शन
- Titan Company: शेयर 1.12% गिरकर ₹5,045.50 पर बंद हुआ।
- Kalyan Jewellers: इसमें 4.50% की बड़ी गिरावट आई और यह ₹587 पर बंद हुआ।
आगे की राह और जोखिम
All India Gem and Jewellery Domestic Council जैसी संस्थाओं का मानना है कि इससे रिटेल इकोसिस्टम और कारीगरों की आजीविका पर बुरा असर पड़ सकता है। निवेशकों के लिए असली चिंता यह है कि क्या सरकार आने वाले समय में इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ा सकती है या 'Gold Monetisation Scheme' के जरिए और कड़े नियम ला सकती है। अब सबकी नजरें आगामी त्योहारी सीजन की डिमांड पर टिकी हैं कि क्या लोग पीएम की अपील का पालन करते हैं या बाजार में खरीदारी जारी रहती है।
