सोने की रिकॉर्ड कीमतों के बीच भारतीय ज्वेलरी रिटेलर्स ने भारी स्टॉक खरीदना कम कर दिया है। कैश बचाने के लिए कंपनियां अब मांग के हिसाब से ही खरीदारी कर रही हैं, जबकि ग्राहक अब छोटे गोल्ड आइटम्स और डिजिटल विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद भारतीय ज्वेलरी रिटेलर्स ने अपने बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव किया है। बड़ी ज्वेलरी चेन अब पारंपरिक 'बल्क स्टॉक' के बजाय रियल-टाइम सेल्स डेटा के आधार पर सोना खरीद रही हैं। इस रणनीति का मुख्य मकसद 'वर्किंग कैपिटल' को सुरक्षित रखना है, क्योंकि महंगा सोना बड़ी मात्रा में खरीदने से कंपनी का कैश लंबे समय के लिए फंस जाता है।\n\n### ग्राहकों की बदलती पसंद\n\nमहंगाई के असर से आम ग्राहकों की खरीदारी की आदतें भी बदल गई हैं। अब लोग भारी गहनों के बजाय गोल्ड कॉइन्स, बार या डिजिटल गोल्ड में निवेश करना पसंद कर रहे हैं। रिटेलर्स भी अब ऐसे प्रोडक्ट्स पर ध्यान दे रहे हैं जिनकी बिक्री तेज हो, ताकि उन्हें लंबे समय तक महंगी इन्वेंट्री अपने पास न रखनी पड़े।\n\n### निवेशकों के लिए क्या है संकेत?\n\nTitan Company, Kalyan Jewellers और Senco Gold जैसी लिस्टेड कंपनियों पर इस बदलाव का गहरा असर पड़ेगा। कम स्टॉक रखने से कंपनी का कैश तो बचता है, लेकिन वेडिंग सीजन जैसे पीक टाइम में 'आउट ऑफ स्टॉक' होने का रिस्क भी बढ़ जाता है। अगर कंपनियां सही डिमांड फोरकास्टिंग नहीं कर पाती हैं, तो उनकी सेल्स पर असर पड़ सकता है।\n\nआने वाले समय में इन कंपनियों के क्वार्टरली नतीजे यह साफ कर देंगे कि उनकी यह 'लीन इन्वेंट्री' (lean inventory) रणनीति उनके मार्जिन और ऑपरेटिंग कैश फ्लो को कितना सपोर्ट कर पाती है।
