ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज (Jefferies) ने सोने (Gold) पर अपना रुख सकारात्मक कर लिया है। अमेरिका और जापान की सरकारों की बिगड़ती माली हालत को देखते हुए फर्म का मानना है कि सोना एक सुरक्षित निवेश साबित हो सकता है।
बढ़ते कर्ज का 'गोल्डन' फायदा?
जेफरीज की 'GREED & fear' रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और जापान जैसे बड़े देशों की खस्ताहाल वित्तीय स्थिति सोने को एक प्रभावी बचाव का जरिया बना रही है। बढ़ते सरकारी कर्ज और मॉनेटरी पॉलिसी पर इसके असर के बीच ग्लोबल मार्केट्स दबाव में हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका का संघीय कर्ज $40 ट्रिलियन के पार जा चुका है, और जुलाई 2026 में $432 बिलियन का मासिक घाटा दर्ज हुआ, जो कि किसी भी जुलाई महीने का रिकॉर्ड है। वहीं, जापान का घाटा पिछले पूरे साल के घाटे से आगे निकल गया है। जेफरीज का मानना है कि कर्ज का यह भारी बोझ सेंट्रल बैंक्स की ब्याज दरें बढ़ाने की क्षमता को सीमित करता है, जो सोने की कीमतों के लिए एक सपोर्टिव माहौल बनाता है।
गोल्ड माइनिंग स्टॉक्स में तेजी का दम
मैक्रो इकोनॉमिक्स के अलावा, जेफरीज ने गोल्ड माइनिंग कंपनियों के फंडामेंटल्स में भी बड़ा बदलाव देखा है। फर्म के अनुसार, ये कंपनियां S&P 500 इंडेक्स की कई कंपनियों से बेहतर फ्री कैश फ्लो (Free Cash Flow) जेनरेट कर रही हैं। फिलाडेल्फिया स्टॉक एक्सचेंज गोल्ड एंड सिल्वर इंडेक्स का फ्री कैश फ्लो यील्ड 3.74% है, जबकि S&P 500 का यील्ड घटकर 2.67% रह गया है। यानी, सोने की खदानों वाली कंपनियां बाज़ार की तुलना में कैश जेनरेट करने में बेहतर स्थिति में हैं।
भू-राजनीतिक तनाव का सहारा
सोने को भू-राजनीतिक अस्थिरता के खिलाफ एक अहम हेज (Hedge) के तौर पर भी देखा जा रहा है। खासकर मध्य पूर्व (Middle East) और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास बढ़ता तनाव एनर्जी मार्केट्स को बाधित कर सकता है। ऐसी स्थिति में, एनर्जी स्टॉक्स के अलावा सोने को पोर्टफोलियो बचाने का दूसरा सबसे अच्छा विकल्प बताया गया है।
निवेशकों के लिए रिस्क फैक्टर
हालांकि, निवेशकों को कुछ जोखिमों पर भी ध्यान देना चाहिए। सोना एक नॉन-यील्डिंग एसेट है, यानी इससे कोई ब्याज नहीं मिलता। अगर US ट्रेजरी यील्ड 5% के पार जाता है, तो यह इक्विटी मार्केट्स, जिसमें गोल्ड स्टॉक्स भी शामिल हैं, के लिए दबाव और वोलेटिलिटी (Volatility) ला सकता है। लगातार बढ़ती महंगाई और सेंट्रल बैंक्स द्वारा दरें बढ़ाने में आने वाली मुश्किलें ग्लोबल मार्केट्स के लिए एक जटिल स्थिति बनाए हुए हैं।
