ईरान के तनाव ने कच्चे तेल में लगाई आग! Brent $110 पार, महंगाई बढ़ने का डर

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AuthorAditya Rao|Published at:
ईरान के तनाव ने कच्चे तेल में लगाई आग! Brent $110 पार, महंगाई बढ़ने का डर
Overview

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में बढ़ते खतरों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तीसरे दिन बड़ी तेजी देखने को मिली है। Brent क्रूड **$110** प्रति बैरल के पार निकल गया है, जबकि WTI भी **$107** के करीब पहुंच गया है। इस उछाल ने वैश्विक सप्लाई (supply) को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं और महंगाई (inflation) को और भड़काने का डर सता रहा है।

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तेल की कीमतों में भू-राजनीतिक डर से भारी उछाल

वैश्विक तेल बाजारों में आज एक बार फिर जोरदार तेजी देखी जा रही है। Brent क्रूड फ्यूचर्स (futures) $110 प्रति बैरल के ऊपर निकल गए हैं, वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी $107 के स्तर के करीब पहुंच गया है। फरवरी के अंत से अब तक इनमें 50% से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है। इस बड़ी बढ़ोतरी की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में संभावित व्यवधान (disruptions) हैं। बाजार को सप्लाई में और कमी आने की आशंका है, जिससे बेंचमार्क कीमतों में पिछले कई सालों का रिकॉर्ड टूटा है।

रूसी तेल की बिक्री पर छूट (waiver) का खत्म होना भी बना दबाव का कारण

इसके अलावा, 16 मई, 2026 को एक अहम अमेरिकी ट्रेजरी छूट (waiver) की अवधि समाप्त हो गई, जो रूसी समुद्री तेल की बिक्री की अनुमति देती थी। भारत और इंडोनेशिया जैसे देशों द्वारा मोहलत बढ़ाने के अनुरोधों के बावजूद यह फैसला लिया गया, क्योंकि वे पहले से ही सप्लाई की कमी झेल रहे थे। इस फैसले ने रूसी ऊर्जा निर्यात के लिए वैश्विक बाजार को और कड़ा कर दिया है। यह पहले से ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की चिंताएं बढ़ा रहा है, जिससे दुनिया के करीब 20-25% समुद्री तेल व्यापार होता है। सुरक्षा चिंताओं और अमेरिकी कार्रवाइयों के कारण इस स्ट्रेट में यातायात में कमी आई है, जिससे निर्यात की मात्रा काफी कम हो गई है। खुद ईरान ने अप्रैल के मध्य के बाद से किसी भी सफल समुद्री कच्चे तेल निर्यात की सूचना नहीं दी है।

अर्थव्यवस्था पर असर: महंगाई और उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ

तेल की बढ़ती कीमतें अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर रही हैं। विश्लेषकों का कहना है कि तेल की कीमतों में हर 10% की बढ़ोतरी, तीन महीनों में मुख्य उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में लगभग 35 बेसिस पॉइंट जोड़ सकती है। इसके साथ ही, पेट्रोल की कीमतें भी औसतन $4.50 प्रति गैलन तक पहुंच गई हैं, जिसका सीधा असर उपभोक्ताओं और व्यवसायों पर पड़ रहा है। Morgan Stanley के विश्लेषकों ने बाजार की स्थिति को 'समय के खिलाफ दौड़' बताया है और चेतावनी दी है कि यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जून तक बंद रहता है तो आर्थिक समर्थन (economic support) कम हो सकता है।

एनर्जी सेक्टर एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) जैसे Energy Select Sector SPDR Fund (XLE) और Vanguard Energy ETF (VDE) ने पिछले एक साल में लगभग 18-19% का रिटर्न दिखाया है, जो सेक्टर की मजबूती को दर्शाता है। ऑयल एंड गैस एक्सप्लोरेशन एंड प्रोडक्शन इंडस्ट्री का औसत PE रेशियो 19.20 है।

तेजी के आगे बड़ा खतरा: सप्लाई बनाम डिमांड

हालांकि मौजूदा रुझान कीमतों को ऊपर ले जा रहा है, लेकिन इस तेजी के आगे कई बड़े खतरे मंडरा रहे हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यवधान से बचना मुश्किल है; फारस की खाड़ी से निर्यात के लिए कोई बड़े वैकल्पिक समुद्री मार्ग नहीं हैं। यदि स्ट्रेट लंबे समय तक बंद रहता है, तो ऊर्जा-निर्भर उद्योगों के लिए लागत का दबाव बना रहेगा और महंगाई बढ़ती रहेगी। बाजार केवल निश्चित घटनाओं पर ही नहीं, बल्कि सप्लाई में व्यवधान की संभावना पर भी प्रतिक्रिया करता है। यह संवेदनशीलता तेल की कीमतों को तेजी से गिरा सकती है यदि कोई कूटनीतिक सफलता मिलती है, चाहे वह कितनी भी असंभावित क्यों न हो।

लगातार उच्च ऊर्जा लागत से मांग में कमी का जोखिम भी है। यदि कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो उपभोक्ता और व्यवसाय खर्च में कटौती कर सकते हैं, जिससे ऊंची कीमतों का तर्क कमजोर हो जाएगा। 1970 के दशक के तेल संकटों जैसे पिछले ऊर्जा संकटों ने दिखाया है कि लंबे समय तक चलने वाले तेल झटके आर्थिक ठहराव और महंगाई को जन्म दे सकते हैं, जिससे केंद्रीय बैंकों के लिए निर्णय लेना मुश्किल हो जाता है। रूसी तेल छूट का समाप्त होना, भले ही तत्काल सप्लाई को टाइट करता हो, लेकिन बाजार को स्थिर करने में मदद करने वाले एक उपकरण को भी हटा दिया है। भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम (risk premium) भी तनाव कम होने पर तेजी से गायब हो सकते हैं। वर्तमान उच्च मूल्य का माहौल अंततः उत्पादकों को नुकसान पहुंचा सकता है यदि इससे मांग कम होती है और कीमतों को स्थिर करने के लिए नीतियां आती हैं।

विशेषज्ञों की राय में बड़ा अंतर

बाजार के आउटलुक (outlook) मिले-जुले हैं। J.P. Morgan Global Research का अनुमान है कि 2026 में Brent क्रूड का औसत $97 प्रति बैरल रहेगा, लेकिन वे जून तक परिचालन संबंधी समस्याओं की चेतावनी देते हैं यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रहता है। उनका लॉन्ग-टर्म नजरिया $60/bbl का है, जो सप्लाई-डिमांड की कमजोर बुनियाद को देखते हुए है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) को उम्मीद है कि Brent की कीमतें मई और जून में $106/bbl के आसपास रहेंगी, फिर 2026 के अंत तक $89/bbl और 2027 में $79/bbl तक गिर जाएंगी, क्योंकि मध्य पूर्व का उत्पादन बढ़ेगा। एनालिस्ट ट्रॉय डब्ल्यू. एकार्ड (Troy W. Eckard) का अनुमान है कि WTI 2026 के अंत तक $95/बैरल तक पहुंच सकता है, जिसका कारण सप्लाई-डिमांड में असंतुलन और संघर्ष के कारण ऊर्जा की बढ़ी हुई जरूरत है। कच्चे तेल की भविष्य की कीमतें अप्रत्याशित अमेरिकी-ईरान स्थिति और प्रमुख वैश्विक शिपिंग मार्गों की सुरक्षा से मजबूती से जुड़ी हुई हैं।

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