होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का बड़ा फैसला
ईरान के विदेश मंत्री ने पुष्टि की है कि 10 दिन के इज़राइल-लेबनान सीजफायर के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों का आवागमन जारी रहेगा। यह महत्वपूर्ण कदम पिछले कुछ हफ्तों से जारी तनाव और अनिश्चितता को कम करने वाला है, जिसने कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव ला दिया था।
इस घोषणा का असर यह भी हुआ है कि बढ़े हुए वॉर-रिस्क प्रीमियम (War-risk premium) के कारण माल ढुलाई (Freight) और बीमा की लागतों में आई अचानक तेजी पर भी लगाम लगी है।
बाज़ारों में राहत, पर सावधानी जारी
बाज़ारों में इस खबर का सकारात्मक असर देखने को मिला। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भी जलडमरूमध्य के खुले रहने की पुष्टि ने इस धारणा को और मजबूत किया कि तत्काल सप्लाई में कोई बड़ी बाधा नहीं आएगी।
हालांकि, व्यापारी अभी भी पूरी तरह से निश्चिंत नहीं हैं। मौजूदा सीजफायर सिर्फ 10 दिनों के लिए है और यह स्थायी समाधान नहीं है। ऐसे में, भू-राजनीतिक तनाव अभी भी बने हुए हैं, जिसके कारण बाज़ारों में थोड़ी सावधानी बनी हुई है और जोखिम प्रीमियम (Risk premium) ऊंचे रहने की उम्मीद है।
भारत के लिए क्यों है खास?
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा सप्लाई के लिए बेहद अहम है, क्योंकि दुनिया का लगभग 20% तेल इसी मार्ग से होकर गुजरता है। यहां किसी भी तरह की रुकावट तुरंत तेल की कीमतों को बढ़ा देती है और सप्लाई चेन को बाधित कर देती है।
भारत जैसे बड़े तेल आयातकों के लिए, इस जलडमरूमध्य से निर्बाध प्रवाह (uninterrupted flow) बनाए रखना महंगाई (Inflation) को काबू करने और मुद्रा की स्थिरता (Currency stability) के लिए बहुत ज़रूरी है।
ऐसे में, ईरान का यह निर्णय अल्पावधि (short-term) के लिए राहत जरूर है, लेकिन इसका दीर्घकालिक (long-term) प्रभाव पूरी तरह से सीजफायर की अवधि पर ही निर्भर करेगा। अगर यह समझौता टूटता है, तो वैश्विक तेल सप्लाई फिर से बाधित हो सकती है और ऊर्जा क्षेत्र की लागतें बढ़ सकती हैं।
