ईरान सरकार ने फ्यूल की भारी मांग और सीमित रिफाइनरी क्षमता के बीच बड़ा फैसला लिया है। 8 सितंबर, 2026 से लागू हुए इस नए नियम के तहत, भारी मात्रा में पेट्रोल का इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए कीमतें सीधे दोगुनी कर दी गई हैं, जिसका असर लगभग 15% आबादी पर पड़ेगा।
क्या है नया नियम?
ईरान सरकार ने पेट्रोल की खपत को नियंत्रित करने के लिए कड़ा कदम उठाया है। अब यदि कोई उपभोक्ता मासिक 110 लीटर के कोटे से ज्यादा पेट्रोल का इस्तेमाल करता है, तो उसे अधिक कीमत चुकानी होगी। नए निर्देशों के अनुसार, 8 सितंबर, 2026 से भारी खपत करने वालों के लिए पेट्रोल का दाम 5,000 तोमन से बढ़कर 10,000 तोमन प्रति लीटर हो गया है। राहत की बात यह है कि शुरुआती 110 लीटर के लिए कीमतें पहले की तरह ही बनी रहेंगी, जिससे आम जनता पर ज्यादा दबाव न पड़े।
क्यों लिया गया यह सख्त फैसला?
देश में फ्यूल की मांग और सप्लाई के बीच बड़ा असंतुलन पैदा हो गया है। अगस्त 2026 में पेट्रोल की दैनिक खपत 145 मिलियन लीटर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई, जबकि देश की कुल रिफाइनरी क्षमता केवल 122 मिलियन लीटर है। इस भारी कमी को पूरा करने के लिए सरकार को महंगे पेट्रोल का आयात करना पड़ रहा है, जिससे खजाने पर भारी दबाव है।
आर्थिक चुनौतियों का सामना
ईरान की अर्थव्यवस्था इस समय कठिन दौर से गुजर रही है। देश में महंगाई दर करीब 67% है और करेंसी की वैल्यू डॉलर के मुकाबले लगातार गिर रही है। समानांतर बाजारों में डॉलर 22 लाख रियाल के पार ट्रेड कर रहा है। सरकार का तर्क है कि सब्सिडी का बोझ उठाना अब मुश्किल होता जा रहा है और इस बढ़ोतरी से मिलने वाले राजस्व को वापस परिवारों को बांटकर उनकी क्रय शक्ति को सहारा देने की कोशिश की जाएगी।
ग्लोबल मार्केट पर असर
ईरान दुनिया का एक प्रमुख तेल उत्पादक देश है। हालांकि यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के दायरे में है, लेकिन वहां के घरेलू नीतिगत बदलावों पर ग्लोबल एनर्जी एनालिस्ट्स की पैनी नजर है। इतिहास गवाह है कि ईरान में फ्यूल सब्सिडी को लेकर लिए गए फैसले अक्सर सार्वजनिक विरोध और अशांति का कारण बनते रहे हैं। इसी जोखिम को देखते हुए सरकार ने इस बार सिर्फ 15% यूजर्स को दायरे में रखा है ताकि पूरे देश में आर्थिक झटका न लगे। निवेशकों के लिए यह घटनाक्रम क्षेत्रीय स्थिरता और ग्लोबल ऑयल सप्लाई के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
