ईरान में चल रहे संघर्ष ने वैश्विक पिस्ता बाजार में हलचल मचा दी है, जिससे कीमतें पिछले 8 सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। यह भू-राजनीतिक घटना मौजूदा सप्लाई चेन की समस्याओं को और बढ़ा रही है, और रिकॉर्ड उपभोक्ता मांग के साथ मिलकर फूड मैन्युफैक्चरर्स के लिए एक मुश्किल स्थिति पैदा कर रही है, जो इस लोकप्रिय मेवे पर बहुत निर्भर करते हैं।
सप्लाई चेन पर गहरा असर
ईरान में संघर्ष ने हॉरमज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों को गंभीर रूप से बाधित कर दिया है, जो वैश्विक व्यापार और ईरानी पिस्ता निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण रास्ता है। इसके चलते, कई शिपिंग रद्द हुई हैं और युद्ध-जोखिम बीमा की लागत बढ़ी है। इससे माल ढुलाई की कीमतें बढ़ी हैं और डिलीवरी का समय लंबा हो गया है। नतीजतन, अमेरिकी पिस्ता की थोक कीमतों पर जबरदस्त दबाव देखा जा रहा है। छिलके वाले पिस्ता की कीमतें $10.29 प्रति पाउंड तक पहुंच सकती हैं, जबकि $4.60 से $11.51 प्रति पाउंड की एक विस्तृत थोक रेंज देखी जा रही है। मार्च में इसी तरह की कीमत वृद्धि देखी गई थी, जो मई 2018 के बाद सबसे अधिक थी। इसका असर दुनिया भर में महसूस किया जा रहा है, खासकर भारत जैसे देश, जो ईरानी आयात पर बहुत निर्भर करते हैं, उन्होंने एक ही सप्ताह में कीमतों में लगभग 26% की भारी बढ़ोतरी देखी है।
मांग और सप्लाई में भारी अंतर
कीमतों में यह उछाल उपभोक्ताओं की मजबूत मांग के बीच आई है, जो 'दुबई चॉकलेट' जैसे वायरल सोशल मीडिया ट्रेंड्स और Häagen-Dazs और Starbucks जैसे बड़े फूड ब्रांड्स द्वारा पिस्ता के उपयोग से बढ़ी है। हालांकि, वैश्विक सप्लाई घट रही है। ईरान, जो पिस्ता का एक प्रमुख उत्पादक है, अब बाजार में लगभग 18% हिस्सेदारी रखता है, जिसका एक कारण पहले के प्रतिबंध और आंतरिक अशांति हैं। इसके अलावा, 2025/2026 का सीजन अमेरिका और ईरान दोनों में उत्पादन के लिए 'ऑफ-ईयर' (कम उत्पादन वाला साल) है, जिससे सप्लाई स्वाभाविक रूप से कम हो जाएगी। उम्मीद है कि 2025/2026 मार्केटिंग वर्ष के लिए वैश्विक पिस्ता उत्पादन में लगभग 8% की गिरावट आएगी, जिसमें ईरान और तुर्की में महत्वपूर्ण गिरावट की भविष्यवाणी की गई है।
निर्माताओं की दुविधा
फूड मैन्युफैक्चरर्स के सामने एक कठिन विकल्प है: या तो बढ़ी हुई लागत को झेलें, अपने उत्पादों की रेसिपी बदलें, या वैकल्पिक इंग्रेडिएंट्स का रुख करें। हालांकि, पिस्ता का विशेष आकर्षण उन्हें बदलना मुश्किल बनाता है। विश्लेषकों का अनुमान है कि गर्मियों के उत्पादों में पिस्ता के हल्के फ्लेवर का इस्तेमाल हो सकता है या उन्हें पूरी तरह से बदल दिया जा सकता है। यह दबाव तब आ रहा है जब व्यापक नट इंग्रेडिएंट्स बाजार प्लांट-बेस्ड और फंक्शनल फूड ट्रेंड्स से लाभान्वित हो रहा है, जिसमें बादाम, काजू और हेज़लनट्स का भी अधिक उपयोग किया जा रहा है।
बाजार की गहरी कमजोरियां
तत्काल भू-राजनीतिक घटना के अलावा, पिस्ता बाजार को प्रभावित करने वाली कुछ गहरी कमजोरियां भी हैं। यह उद्योग समुद्री मार्गों, विशेष रूप से हॉरमज जलडमरूमध्य पर बहुत अधिक निर्भर करता है, जो इसे क्षेत्रीय अस्थिरता के प्रति संवेदनशील बनाता है। इसके अलावा, 2026 उत्पादन चक्र अमेरिका और ईरान जैसे प्रमुख उत्पादकों के लिए एक 'ऑफ-ईयर' है, जिसका मतलब है संघर्ष की परवाह किए बिना कम पैदावार। सूखे, फसल की पैदावार में कमी और ईरान में आंतरिक बाधाओं जैसी मौजूदा समस्याओं ने पहले ही निर्यात को प्रभावित किया है।
भविष्य का दृष्टिकोण
वर्तमान सप्लाई झटकों के बावजूद, पिस्ता की दीर्घकालिक मांग मजबूत बनी हुई है, जो उनकी लोकप्रियता और स्वास्थ्य लाभों से प्रेरित है। अमेरिका अपने उत्पादन का रकबा बढ़ा रहा है ताकि भविष्य में सप्लाई की कमी को पूरा किया जा सके, भले ही 2026 में चक्रीय बाधाएं हों। मैन्युफैक्चरर्स संभवतः ग्राहकों की अपेक्षाओं और इंग्रेडिएंट्स बदलने के जोखिमों के खिलाफ पिस्ता की बढ़ती लागत को संतुलित करते हुए नवाचार करते रहेंगे। ईरान की वर्तमान भू-राजनीतिक स्थिति, प्राकृतिक उत्पादन चक्रों के साथ, 2026 और उसके बाद भी वैश्विक पिस्ता बाजार के लिए कीमतों में उतार-चढ़ाव और सावधानीपूर्वक सप्लाई चेन प्रबंधन को प्रमुख मुद्दे बनाए रखेगी।