Iran में बढ़ते तनाव के कारण ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतें उछल गई हैं। इसका सीधा असर भारत के मैन-मेड फाइबर (MMF) इंडस्ट्री पर पड़ रहा है, जहां रॉ मटेरियल महंगा होने से कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ गया है।
कच्चे तेल की आग और बढ़ती लागत
Iran-Israel के बीच बिगड़ते हालातों ने ग्लोबल स्तर पर क्रूड ऑयल की कीमतों को आग लगा दी है। चूँकि सिंथेटिक फैब्रिक बनाने के लिए जरूरी रॉ मटेरियल जैसे Purified Terephthalic Acid (PTA) और Monoethylene Glycol (MEG) पूरी तरह से क्रूड ऑयल के डेरिवेटिव हैं, इसलिए भारतीय मैन्युफैक्चरर्स के लिए लागत अचानक से बढ़ गई है। इसका सबसे बुरा असर Tiruppur और Ludhiana जैसे बड़े टेक्सटाइल हब पर पड़ रहा है।
मार्जिन पर भारी दबाव
आमतौर पर इस सेक्टर की कंपनियां 5% से 10% के पतले मार्जिन पर काम करती हैं। लागत बढ़ने के बावजूद, ग्राहकों से ज्यादा कीमतें वसूलना इनके लिए चुनौती बना हुआ है, जिससे करंट क्वार्टर में मुनाफे (Profit) में बड़ी गिरावट का डर है। साथ ही, Hormuz की खाड़ी में सप्लाई चेन प्रभावित होने से लॉजिस्टिक्स की दिक्कतें भी बढ़ गई हैं।
नई रणनीति: 'हाई-परफॉर्मेंस' पर दांव
इस संकट से निकलने के लिए कंपनियां अब पारंपरिक कमोडिटी को छोड़कर 'हाई-परफॉर्मेंस सिंथेटिक एक्टिववियर' (Activewear) के उत्पादन पर जोर दे रही हैं। TechnoSport जैसे खिलाड़ी अपने प्रॉडक्ट मिक्स को प्रीमियम बनाने में जुटे हैं ताकि रॉ मटेरियल की वोलेटिलिटी से बचा जा सके।
सरकारी सपोर्ट और एक्सपोर्ट की चिंता
एक्सपोर्ट मार्केट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच, Tiruppur Exporters’ Association ने नीतिगत समर्थन की मांग की है। हालांकि, सरकार की PLI स्कीम को इस सेक्टर के लिए एक बड़ा सहारा माना जा रहा है। आने वाले समय में निवेशकों के लिए यह देखना जरूरी होगा कि कंपनियां मार्जिन कैसे मेंटेन करती हैं और नई कैपेसिटी का इस्तेमाल किस हद तक कर पाती हैं।
